Uttarakhand Weather ने एक बार फिर करवट ली है। प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार बारिश होने के साथ ऊंची हिमालयी चोटियों पर हल्का हिमपात दर्ज किया गया है। बारिश और बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट महसूस की जा रही है, जबकि पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन और सड़क बंद होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मौसम विभाग ने नैनीताल समेत छह जिलों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया है।
प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से मानसूनी गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं। कहीं तेज बारिश हो रही है तो कहीं रुक-रुककर बौछारें पड़ रही हैं। देहरादून और आसपास के मैदानी क्षेत्रों में बारिश की रफ्तार कुछ धीमी जरूर हुई है, लेकिन पर्वतीय जिलों में मौसम की स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
Uttarakhand Weather के कारण पिथौरागढ़ में स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद
पिथौरागढ़ जिले में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को खासा प्रभावित किया है। रात से जारी बारिश के बाद कई सड़क मार्गों पर मलबा आने और रास्ते बंद होने की स्थिति पैदा हो गई। जिले में बड़ी संख्या में मार्ग बाधित होने के कारण एहतियात के तौर पर स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया।
लगातार बारिश से ग्रामीण इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर लोगों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सीमांत क्षेत्रों की सड़कें बंद होने से चीन सीमा के नजदीक स्थित गांवों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।
पर्वतीय जिलों में मौसम बदलने के साथ प्रशासन की चुनौती भी बढ़ जाती है। बारिश के दौरान भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों में लगातार निगरानी जरूरी हो जाती है, क्योंकि पहाड़ी सड़कों पर मलबा आने से संपर्क मार्ग अचानक बंद हो सकते हैं।
नैनीताल में लगातार बारिश, ग्रामीण सड़कें प्रभावित
नैनीताल जिले में भी पिछले 24 घंटों से बारिश का दौर बना हुआ है। लगातार हो रही वर्षा के कारण झील के जलस्तर और आसपास की व्यवस्थाओं पर नजर रखी जा रही है। जिले की कई ग्रामीण सड़कों पर आवाजाही बाधित होने की जानकारी सामने आई है।
बारिश के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कें सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। छोटे संपर्क मार्गों पर मलबा आने के बाद ग्रामीणों को कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है। बारिश का असर पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय कारोबार पर भी पड़ता है।
नैनीताल और आसपास के इलाकों में प्रशासन मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
Uttarakhand Weather: छह जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट
मौसम विभाग ने नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, ऊधम सिंह नगर, पौड़ी और चमोली जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई है। इन जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने कई क्षेत्रों में आकाशीय बिजली चमकने और बारिश के तीव्र दौर की आशंका भी जताई है।
बारिश के दौरान नदी-नालों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों और पहाड़ी मार्गों से यात्रा करने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी के आसपास हिमपात
प्रदेश में बारिश के बीच ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम का अलग ही रूप देखने को मिला। हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी और आसपास की ऊंची पहाड़ियों पर हल्का हिमपात दर्ज किया गया। सितंबर के मौसम में बारिश के साथ बर्फबारी ने पहाड़ों में ठंडक बढ़ा दी है।
ऊंची चोटियों पर बर्फबारी के कारण निचले क्षेत्रों के तापमान पर भी असर पड़ सकता है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी मौसम में यह बदलाव खास अनुभव लेकर आया है। हालांकि खराब मौसम के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा जोखिमपूर्ण हो सकती है।
चीन सीमा से लगे इलाकों का संपर्क प्रभावित
पिथौरागढ़ जिले में लगातार बारिश के कारण सीमांत क्षेत्रों की स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई स्थानों पर सड़कें बंद होने से चीन सीमा से लगे इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
कूलागाड़ के पास हाईवे बाधित होने के कारण व्यास, दारमा और चौदास घाटियों की आवाजाही प्रभावित होने की जानकारी है। इससे बड़ी आबादी पर असर पड़ा है। दूसरी ओर, मुनस्यारी-मिलम मार्ग बंद होने से मल्ला जोहार क्षेत्र के कई गांवों का संपर्क भी बाधित हुआ है।
सीमांत क्षेत्रों में सड़क बंद होने का असर केवल यात्रा तक सीमित नहीं रहता। इससे खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे इलाकों में सड़क खुलवाना प्रशासन और संबंधित विभागों की प्राथमिकता बन जाता है।
कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग भी कई स्थानों पर बंद
भारी बारिश और भूस्खलन के कारण कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग भी कई जगह प्रभावित हुआ है। कुछ स्थानों पर सड़क को नुकसान पहुंचने और मलबा आने से यातायात बाधित हुआ है। नारायण आश्रम मार्ग समेत कई संपर्क मार्गों को खोलने के लिए विभागीय टीमें काम कर रही हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कें खोलने का काम मौसम पर काफी निर्भर करता है। यदि बारिश लगातार जारी रहे तो मलबा हटाने के बाद भी दोबारा भूस्खलन की स्थिति बन सकती है।
Uttarakhand Weather को देखते हुए सावधानी जरूरी
Uttarakhand Weather के लगातार बदलते मिजाज के बीच लोगों को यात्रा के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में पहाड़ी सड़कों, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित इलाकों से बचने की सलाह दी जाती है।
उत्तराखंड में बारिश और हिमपात ने एक बार फिर दिखा दिया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम का बदलाव कितनी तेजी से जनजीवन को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में मौसम विभाग के अलर्ट और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी पर नजर रखना जरूरी होगा। सड़क बंद होने, भूस्खलन और तेज बारिश की स्थिति में अनावश्यक यात्रा से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प हो सकता है।







