Dehradun Rain Havoc ने एक बार फिर उत्तराखंड में मानसूनी बारिश की विकराल तस्वीर पेश कर दी है। पहाड़ों में रुक-रुक कर हो रही मूसलाधार बारिश और जगह-जगह हो रहे भूस्खलन के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। राजधानी देहरादून से लेकर सीमांत जिलों तक नदियां-नाले पूरे उफान पर हैं, जिससे तटीय इलाकों और संवेदनशील पहाड़ियों के पास बसे गांवों में रहने वाले लोगों की रातें खौफ में बीत रही हैं।
Dehradun Rain Havoc: मालदेवता क्षेत्र में कुंड गांव के पास बही सड़क
देहरादून जिले का मालदेवता क्षेत्र इस मानसूनी तबाही का सबसे बड़ा शिकार बना है। मालदेवता से सौंदना गांव में निर्माणाधीन सॉन्ग बांध साइट की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग कुंड गांव के पास अत्यधिक बारिश के चलते ताश के पत्तों की तरह बह गया। सड़क का बड़ा हिस्सा नदी में समा जाने के कारण इलाके की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।
मार्ग टूटने से हिंलासवाली, सौंदना, तौलियाकाटल, रगड़ गांव, घुड़सवालगांव, शेरा, पसनी, कुंड और हल्द्वाड़ी जैसे कई गांवों का बाकी दुनिया से संपर्क कट गया है। इन ग्रामीण इलाकों में आवश्यक खाद्य पदार्थों, दवाओं और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की किल्लत होने का खतरा पैदा हो गया है। आपातकालीन स्थिति में बीमार लोगों को मुख्य शहर के अस्पतालों तक पहुँचाना परिजनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। local प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने के रास्ते तलाशने में जुटी हुई हैं।
Dehradun Rain Havoc Causes High Threat Near Tons River
बारिश का कहर केवल सड़कों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नदियों का बढ़ता जलस्तर रिहायशी इलाकों के लिए काल बनता जा रहा है। जैंतानवाला की ग्राम सभा दयानगर में भारी बरसात और उफनती टोंस नदी के प्रचंड बहाव के कारण किनारे पर स्थिति काफी नाजुक हो गई है। नदी के तेज कटान की वजह से सुनीता उपाध्याय का मकान कटान की जद में आ गया है और कभी भी ढहने की कगार पर पहुँच चुका है।
आस-पास के अन्य मकानों पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। ग्रामीण डर के साये में जीने को मजबूर हैं और कई परिवारों ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से अपने घरों को खाली कर सुरक्षित स्थानों का रुख करना शुरू कर दिया है। जलभराव और मिट्टी के कटाव से कई स्थानों पर भूधंसाव की स्थिति बनी हुई है।
Dehradun Rain Havoc Impact: प्रदेश भर में 86 मोटर मार्ग बंद
उत्तराखंड के अन्य हिस्सों में भी हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। पहाड़ी ढलानों से लगातार दरक रहे मलबे और पत्थरों के कारण प्रदेश भर में 86 से अधिक मोटर मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। चमोली जिले में 18 और रुद्रप्रयाग में 13 संपर्क मार्ग मलबे से पटे पड़े हैं, जिससे दूरदराज के दर्जनों गांवों की कनेक्टिविटी टूट गई है।
सबसे चिंताजनक स्थिति पिथौरागढ़ जिले में देखने को मिल रही है, जहाँ टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग कुलागाड़ के समीप भारी मलबे के कारण बाधित हो गया है। इसके साथ ही कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग भी तीन अलग-अलग स्थानों पर लैंडस्लाइड के कारण बंद पड़ा है। चीन सीमा से जुड़ने वाले इन रणनीतिक मार्गों के बंद होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में रसद आपूर्ति और सैन्य आवाजाही पर भी असर पड़ा है।
नैनीताल जिले में ज्योलीकोट-अल्मोड़ा हाईवे पर दो गांवों के पास पहाड़ी का बड़ा हिस्सा अचानक नीचे आ गिरा, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NH) की जेसीबी मशीनें और राहत टीमें दिन-रात मलबा हटाकर मार्ग खोलने के प्रयास में लगी हैं, लेकिन रुक-रुक कर हो रही बारिश राहत कार्यों में लगातार बाधा डाल रही है।
Dehradun Rain Havoc Alert: मौसम विभाग की चेतावनी और यात्रा एडवाइजरी
मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के 10 जिलों में भारी वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया है। आगामी दिनों में मानसून के अत्यधिक सक्रिय रहने की संभावना जताई गई है, जिससे संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन और नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि का खतरा बना हुआ है।
प्रशासन ने सभी संवेदनशील जिलों के जिलाधिकारियों और आपदा प्रबंधन तंत्र को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों से अपील की गई है कि वे मौसम का सटीक पूर्वानुमान जांचने के बाद ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। नदियों, नालों और भूस्खलन संभावित पहाड़ी रास्तों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।
ALSO READ THIS:Uttarakhand Weather: मानसून फिर सक्रिय, 2 सितंबर तक भारी बारिश; देहरादून सहित 8 जिलों में आज यलो अलर्ट





