देहरादून।
उत्तराखंड सरकार ने राज्य के वृद्धों, विधवाओं, दिव्यांगों और अन्य जरूरतमंद वर्गों के प्रति अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता को दोहराते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को राज्य के लगभग 9.87 लाख पेंशन लाभार्थियों के बैंक खातों में 146 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की। यह राशि जुलाई माह की पेंशन किश्त के रूप में जारी की गई है।
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान सीएम धामी ने बटन दबाकर डिजिटल माध्यम से पारदर्शी तरीके से यह वित्तीय सहायता लाभार्थियों के खातों में भेजी। सरकार के इस कदम से प्रदेशभर के लाखों परिवारों को राहत मिली है।
अंत्योदय के संकल्प को मजबूती: ‘अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगा अधिकार’
पेंशन हस्तांतरण के उपरांत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार समाज के हर वर्ग, विशेषकर वंचित, शोषित और असहाय लोगों के सशक्तिकरण के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रही है।
“हमारी सरकार का मूल उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना है। समाज का हर कमजोर और जरूरतमंद वर्ग राज्य सरकार के वृहद परिवार का अभिन्न अंग है।”
— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री (उत्तराखंड)
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि राज्य के किसी भी बुजुर्ग, विधवा या दिव्यांग नागरिक को अपनी पेंशन के लिए सरकारी दफ्तरों और तंत्र के चक्कर न काटने पड़ें। सरकार का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पात्र नागरिक को उसकी पेंशन समय पर, सम्मानपूर्वक और बिना किसी लालफीताशाही या परेशानी के सीधे उसके खाते में प्राप्त हो।
पारदर्शी प्रणाली और समयबद्ध भुगतान
राज्य सरकार का दावा है कि पेंशन वितरण की इस प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक के माध्यम से अत्यधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया है। अब बिना किसी बिचौलिए के शत-प्रतिशत राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुँच रही है।
कार्यक्रम में उपस्थित समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने योजना की तकनीकी प्रगति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जारी की गई जुलाई माह की पेंशन में राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय से जुड़े लगभग 2.15 लाख पेंशनभोगी भी शामिल हैं। इन सभी को ‘एसएनए स्पर्श प्रणाली’ (SNA SPARSH) के जरिए भुगतान किया गया है, जिससे वित्तीय लेनदेन में सुरक्षा और तेजी दोनों सुनिश्चित हुई हैं।
आठ प्रमुख श्रेणियों में बांटी गई पेंशन राशि (विस्तृत ब्यौरा)
समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत कुल 8 अलग-अलग श्रेणियों में 9,87,017 लाभार्थियों को कुल 146 करोड़ 32 लाख 50 हजार रुपये का वितरण किया गया है। इसका मद-वार ब्यौरा निम्न प्रकार है:6
पेंशन योजना की श्रेणी
लाभार्थियों की संख्या
कुल आवंटित धनराशि
वृद्धावस्था पेंशन
6,15,628
₹92.34 करोड़
विधवा (परित्यक्ता/निराश्रित) पेंशन
2,36,983
₹35.54 करोड़
दिव्यांग पेंशन
89,128
₹13.36 करोड़
किसान पेंशन
27,288
₹3.27 करोड़
परित्यक्ता पेंशन
8,284
₹99.40 लाख
भरण-पोषण अनुदान
7,383
₹51.68 लाख
तीलू रौतेली पेंशन
2,196
₹26.35 लाख
बौना (विशिष्ट) पेंशन
127
₹1.52 लाख
सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक सशक्त कदम
उत्तराखंड जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में, जहाँ दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में आजीविका के संसाधन सीमित हैं, वहाँ यह पेंशन राशि कई परिवारों के लिए दैनिक जीवन यापन का मुख्य सहारा बनती है।
• बुजुर्गों के लिए सहारा: वृद्धावस्था पेंशन के तहत राज्य के 6 लाख से अधिक बुजुर्गों को मासिक आर्थिक सुरक्षा मिल रही है, जिससे वे अपनी दवाओं और दैनिक जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बन पा रहे हैं।
• महिला सशक्तिकरण: लगभग 2.36 लाख विधवा और निराश्रित महिलाओं को आर्थिक सम्बल देकर सरकार उनके सम्मानजनक जीवन की राह आसान कर रही है।
• विशेष प्रोत्साहन: राज्य की वीरांगना के नाम पर दी जाने वाली ‘तीलू रौतेली पेंशन’ और बौने व्यक्तियों के लिए विशेष पेंशन योजना यह दर्शाती है कि सरकार की नजर हर उस वर्ग पर है, जिसे विशेष ध्यान और सहायता की आवश्यकता है।
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निष्कर्ष
डिजिटल इंडिया और ‘गुड गवर्नेंस’ के मॉडल को अपनाते हुए उत्तराखंड सरकार ने डीबीटी के माध्यम से वित्तीय सहायता सीधे जनता के खातों तक पहुंचाकर यह साबित किया है कि तकनीक का सही उपयोग सुशासन की पहली शर्त है। समय पर पेंशन का यह हस्तांतरण न केवल लाखों परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लाएगा, बल्कि राज्य में सामाजिक-आर्थिक न्याय के ताने-बाने को भी और अधिक मजबूत करेगा।







