Badrinath Donation Theft मामले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित चोरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने 21 जून से पहले की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग हासिल करने के लिए पुरानी डीवीआर (DVR) को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेज दिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि पुराना डेटा सफलतापूर्वक रिकवर हो जाता है तो इस पूरे प्रकरण में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
दूसरी ओर, गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति को मंदिर समिति ने दान, आय-व्यय, खजाने का विवरण और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंप दिए हैं। साथ ही 21 जून के बाद की उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज भी जांच के लिए उपलब्ध कराई गई है।
Badrinath Donation Theft की जांच में पुरानी DVR बनी अहम कड़ी
एसआईटी की जांच के दौरान सामने आया कि मंदिर परिसर में लगी पुरानी डीवीआर में 21 जून से पहले की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि जांच एजेंसी को संदेह है कि महत्वपूर्ण डेटा या तो स्वतः हट गया या फिर उसे जानबूझकर मिटाया गया हो सकता है।
इसी संभावना को देखते हुए डीवीआर को देहरादून स्थित एफएसएल भेजा गया है, जहां विशेषज्ञ आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक तकनीकों की सहायता से पुरानी रिकॉर्डिंग रिकवर करने का प्रयास करेंगे।
जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि यह डेटा मिल जाता है तो दान की गिनती के दौरान हुई गतिविधियों की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।
21 जून के बाद की CCTV फुटेज SIT के पास मौजूद
हालांकि 21 जून से पहले का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, लेकिन 22 जून, 25 जून, 29 जून और 2 जुलाई को हुई दान और चढ़ावे की गिनती की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग एसआईटी के पास मौजूद है।
इन फुटेज के आधार पर जांच एजेंसी दान की गिनती की प्रक्रिया का विश्लेषण कर रही है। जांच के दौरान कथित तौर पर ऐसी गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं, जिनकी विस्तार से जांच की जा रही है।
एसआईटी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या कथित अनियमितताएं एक बार हुईं या फिर लगातार कई बार दोहराई गईं।
दान गिनती की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद से 21 जून तक लगभग 40 बार दान और चढ़ावे की गिनती की गई थी।
यदि इस अवधि की सीसीटीवी फुटेज रिकवर हो जाती है, तो जांच एजेंसियों को पूरे घटनाक्रम का विस्तृत रिकॉर्ड मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में दान गिनती की प्रक्रिया के दौरान कुछ प्रक्रियागत गड़बड़ियों के संकेत भी मिले हैं, जिनकी पुष्टि फॉरेंसिक जांच और दस्तावेजों के मिलान के बाद ही हो सकेगी।
दान, आय-व्यय और खजाने के दस्तावेज जांच समिति को सौंपे गए
गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति को मंदिर समिति की ओर से जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं।
इनमें शामिल हैं:
- कपाट खुलने से लेकर 2 जुलाई तक के दान और चढ़ावे का रिकॉर्ड।
- मंदिर के आय-व्यय से जुड़े वित्तीय दस्तावेज।
- मंदिर के खजाने का विस्तृत विवरण।
- 21 जून से जुलाई तक की उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज।
- संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की ड्यूटी सूची।
- मंदिर समिति की आंतरिक जांच रिपोर्ट।
इन दस्तावेजों के आधार पर समिति पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर रही है।
मुख्य आरोपी की पुलिस रिमांड पर जिला जज की अदालत में सुनवाई
Badrinath Donation Theft मामले में मुख्य आरोपी के रूप में सामने आए मंदिर समिति के तत्कालीन वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल और पूर्व अधिकारी राजेंद्र चौहान पहले से न्यायिक हिरासत में हैं।
एसआईटी ने प्रमोद नौटियाल की पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए जिला जज की अदालत में आवेदन किया है। इससे पहले निचली अदालत में दो बार रिमांड की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने आवेदन स्वीकार नहीं किया था।
अब जिला जज की अदालत में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि पुलिस कस्टडी मिलती है, तो एसआईटी आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ कर मामले के अन्य पहलुओं की जांच आगे बढ़ा सकती है।
एफएसएल रिपोर्ट से खुल सकते हैं नए राज
डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ अब पुरानी डीवीआर से डिलीट या ओवरराइट हुए डेटा को रिकवर करने का प्रयास करेंगे।
यदि रिकॉर्डिंग सफलतापूर्वक प्राप्त हो जाती है, तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि दान की गिनती के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और क्या कथित अनियमितताओं का सिलसिला पहले से जारी था।
फॉरेंसिक रिपोर्ट जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
जांच समिति पहले भी कर चुकी है स्थल निरीक्षण
गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता वाली जांच समिति पहले ही बदरीनाथ धाम पहुंचकर स्थल निरीक्षण कर चुकी है।
निरीक्षण के दौरान समिति ने दान गिनती की प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था, रिकॉर्ड प्रबंधन और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की थी। अब दस्तावेजों और सीसीटीवी रिकॉर्ड के विश्लेषण के बाद समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी।
आस्था से जुड़े मामले में पारदर्शिता पर विशेष जोर
बदरीनाथ धाम देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के साथ दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में Badrinath Donation Theft जैसा मामला सामने आने के बाद श्रद्धालुओं की भावनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
इसी कारण जांच एजेंसियां इस पूरे मामले में तकनीकी साक्ष्यों, वित्तीय दस्तावेजों और सीसीटीवी रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष जांच करने पर जोर दे रही हैं।
अब सभी की निगाहें एफएसएल की रिपोर्ट, पुलिस रिमांड पर अदालत के फैसले और जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि पुरानी डीवीआर से डेटा रिकवर हो जाता है, तो यह पूरे मामले में कई महत्वपूर्ण खुलासों का आधार बन सकता है और जांच को नई दिशा मिल सकती है।