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उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव: प्रदेश की 7466 ग्राम पंचायतों में 15 जुलाई को चुने जाएंगे उपप्रधान, राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी की अधिसूचना

On: July 7, 2026 11:33 AM
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​देहरादून। उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया गया है। राज्य के ग्रामीण अंचलों में सरकार के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने और प्रधानों के सहयोग के लिए उपप्रधानों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश की कुल 7,466 ग्राम पंचायतों में उपप्रधान पद के निर्वाचन के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। आगामी 15 जुलाई को इन पदों के लिए मतदान और मतगणना की प्रक्रिया को संपन्न किया जाएगा। हालांकि, इस चुनावी प्रक्रिया से मैदानी जिले हरिद्वार को बाहर रखा गया है।

​निर्वाचन आयुक्त ने दी हरी झंडी, हरिद्वार जिला शामिल नहीं

​राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने सोमवार को प्रेस वार्ता और आधिकारिक आदेश के माध्यम से इस चुनावी कार्यक्रम की घोषणा की। निर्वाचन आयुक्त के अनुसार, प्रदेश के 13 जिलों में से 12 जिलों की 7,466 ग्राम पंचायतों में यह चुनाव एक ही दिन में संपन्न कराया जाएगा।


​हरिद्वार जिले को इस प्रक्रिया में शामिल न किए जाने का मुख्य कारण वहां का अलग चुनावी चक्र (Election Cycle) है। हरिद्वार में पंचायत चुनाव अन्य जिलों की तुलना में अलग समय पर आयोजित होते हैं, जिसके कारण वहां वर्तमान में उपप्रधानों के कार्यकाल की स्थिति भिन्न है। शेष 12 जिलों (देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चम्पावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर) में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

​एक ही दिन में तय होगा फैसला: यह है पूरा टाइम-शेड्यूल

​राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी समय-सारणी के अनुसार, उपप्रधान पद के चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 जुलाई को मात्र कुछ ही घंटों के भीतर संपन्न कर ली जाएगी। नामांकन दाखिल करने से लेकर परिणाम घोषित होने तक का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार निर्धारित किया गया है:

  • ​नामांकन प्रक्रिया: 15 जुलाई को सुबह 10:00 बजे से 11:00 बजे तक योग्य उम्मीदवार अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।
  • ​नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी): सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जमा किए गए पर्चों की बारीकी से जांच की जाएगी।
  • ​नाम वापसी: यदि कोई प्रत्याशी अपना नाम वापस लेना चाहता है, तो उसे दोपहर 12:00 बजे से 12:30 बजे तक का समय दिया जाएगा।
  • ​चुनाव चिह्न आवंटन: दोपहर 12:30 बजे से 1:00 बजे के बीच चुनावी मैदान में डटे अंतिम प्रत्याशियों को उनके चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए जाएंगे।
  • ​मतदान (वोटिंग): दोपहर 1:30 बजे से अपराह्न 3:30 बजे तक कुल दो घंटे का समय मतदान के लिए सुरक्षित रखा गया है।
  • ​मतगणना एवं परिणाम: मतदान संपन्न होने के ठीक आधे घंटे बाद, यानी शाम 4:00 बजे से मतों की गिनती शुरू हो जाएगी और देर शाम तक सभी ब्लॉकों से नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे।

​ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड मेंबर) चुनेंगे अपना उपप्रधान

​इस चुनाव की सबसे खास बात यह है कि इसमें आम जनता सीधे तौर पर मतदान नहीं करती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत, यह एक अप्रत्यक्ष चुनाव (Indirect Election) है। हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनावों में ग्रामीण जनता द्वारा चुने गए ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड मेंबर) ही इस चुनावी प्रक्रिया में मतदाता की भूमिका निभाते हैं।


​संबंधित ग्राम पंचायत के सभी निर्वाचित सदस्य बैठक में हिस्सा लेंगे और अपने बीच से ही किसी एक योग्य सदस्य को ‘उपप्रधान’ के रूप में चुनेंगे। यदि किसी पद पर सहमति नहीं बनती है, तो गुप्त मतदान (Secret Ballot) के जरिए विजेता का फैसला किया जाएगा। इस संबंध में सभी संबंधित 12 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीएम) को मंगलवार को अपने-अपने स्तर से विस्तृत जिला स्तरीय अधिसूचना और गाइडलाइंस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

​ग्रामीण विकास और पंचायती राज में क्यों महत्वपूर्ण है ‘उपप्रधान’?

​उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से विषम राज्य में ग्राम पंचायतों की भूमिका बेहद अहम होती है। पंचायती राज अधिनियम के तहत उपप्रधान का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

  1. ​प्रधान की अनुपस्थिति में कार्यभार: यदि किसी कारणवश ग्राम प्रधान का पद रिक्त हो जाता है, या प्रधान अस्वस्थता या किसी अन्य वजह से कार्य करने में असमर्थ होते हैं, तो उपप्रधान ही पंचायत के वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज को संभालते हैं।
  2. ​विकास कार्यों में संतुलन: उपप्रधान ग्रामीण विकास योजनाओं (जैसे मनरेगा, राज्य वित्त और पंद्रहवें वित्त आयोग के कार्य) के क्रियान्वयन में प्रधान और वार्ड सदस्यों के बीच एक सेतु का काम करते हैं, जिससे विकास कार्यों में पारदर्शिता और गति बनी रहती है।

​प्रशासन ने कसी कमर, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

​राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना जारी होने के बाद से ही सभी 12 जिलों के विकास खंडों (ब्लॉक्स) में प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है। खंड विकास अधिकारियों (BDO) और सहायक निर्वाचन अधिकारियों को पारदर्शी व शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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चूंकि यह चुनाव ग्राम पंचायत स्तर पर ही आयोजित होना है, इसलिए प्रत्येक ग्राम पंचायत भवन या निर्धारित राजकीय प्राथमिक विद्यालयों को मतदान केंद्र बनाया जाएगा। स्थानीय पुलिस और प्रशासन को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि मतदान के दौरान किसी भी प्रकार के आपसी विवाद या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति से निपटा जा सके।

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