नई दिल्ली:
वैश्विक सर्राफा बाजार से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सुरक्षित निवेश और आम जनता की पहली पसंद माना जाने वाला सोना (Gold) इस समय भारी बिकवाली के दौर से गुजर रहा है। वैश्विक और घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, यह अक्टूबर 2008 के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है, जिसने निवेशकों और बाजार विश्लेषकों को हैरान कर दिया है।
अकेले जून के महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय वायदा बाजार तक, सोने के दाम ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं। इस गिरावट ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और सोना लगातार चौथे महीने कमजोरी के साथ बंद होने की कगार पर है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल: $4,000 के नीचे फिसला सोना
वैश्विक स्तर पर सोने की चमक लगातार फीकी पड़ रही है। जून के महीने में अब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 12% तक टूट चुका है। हाजिर बाजार (Spot Gold) में सोने की कीमत 0.8% की ताजा गिरावट के साथ 3,985.57 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई है। वहीं, अगर अमेरिकी वायदा बाजार (US Gold Futures) की बात करें, तो अगस्त डिलीवरी वाला सोना भी 1% फिसलकर 3,999.20 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने का 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। 2024 के बाद यह पहली बार है जब तिमाही आधार पर भी सोने को इतना बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। जून 2013 के बाद यह सोने की सबसे खराब तिमाही साबित हो सकती है।
भारतीय बाजार (MCX) में तहलका: ₹19,700 से ज्यादा टूटा सोना
घरेलू बाजार में भी सोने की कीमतों ने आम खरीदारों को बड़ी राहत दी है, तो वहीं निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जून के महीने में सोने में 19,700 रुपये से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- 1 जून 2026: सोना 1,60,193 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर खुला था।
- 30 जून 2026: यह गिरते हुए 1,40,450 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गया।
- कुल गिरावट: मात्र 30 दिनों के भीतर सोना 19,743 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है।
आखिर क्यों आई सोने में इतनी बड़ी गिरावट? ये 3 फैक्टर पड़े भारी
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आमतौर पर जब भी दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) बढ़ता है, तो लोग सोने को सुरक्षित मानकर निवेश करते हैं। लेकिन इस बार भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी सोने को सहारा देने में नाकाम रही हैं।
वर्तमान में सोने के क्रैश होने के पीछे निम्नलिखित तीन मुख्य कारण हैं:
1. फेड रिजर्व का सख्त रुख और ब्याज दरें बढ़ने का डर
गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और केविन वॉर्श का हालिया बयान है। बाजार को उम्मीद है कि फेड रिजर्व इस साल कम से कम तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। CME FedWatch Tool के मुताबिक, सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 64% तक पहुंच गई है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों से पैसा निकालकर सरकारी बॉन्ड और अन्य साधनों में लगाने लगते हैं, जिससे सोने की मांग घट जाती है।
2. अमेरिका के आगामी आर्थिक आंकड़े
निवेशकों की नजर इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिका के ADP रोजगार आंकड़ों और नॉन-फार्म पेरोल (Non-Farm Payroll) डेटा पर टिकी है। इन आंकड़ों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का पता चलेगा। यदि रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं, तो फेड रिजर्व को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए और मजबूती मिलेगी, जो सोने के लिए नकारात्मक संकेत होगा।
3. 13 महीने के उच्चतम स्तर पर डॉलर इंडेक्स
अमेरिकी डॉलर में आ रही लगातार मजबूती सोने पर सबसे बड़ा दबाव बनकर उभरी है। डॉलर इंडेक्स इस समय पिछले 13 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों की मुद्राओं (जैसे भारतीय रुपया) के लिए सोना खरीदना काफी महंगा हो जाता है। इसके चलते वैश्विक स्तर पर सोने की भौतिक मांग में कमी आई है।
चांदी, प्लैटिनम और पैलेडियम का भी बुरा हाल
सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं में भी गिरावट का रुख देखा जा रहा है:
- चांदी (Silver): 1.3% की गिरावट के साथ 57.53 डॉलर पर आ गई है।
- प्लैटिनम (Platinum): 0.7% टूटकर 1,563.25 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है।
- पैलेडियम (Palladium): इसमें मामूली 0.4% की बढ़त देखी गई और यह 1,218.07 डॉलर पर रहा। हालांकि, मासिक और तिमाही आधार पर ये सभी धातुएं भी बड़े नुकसान की तरफ बढ़ रही हैं।
अब कब लौटेगी सोने में तेजी? एक्सपर्ट्स की राय
सिंगापुर की जानी-मानी फाइनेंशियल फर्म ‘ओवरसी-चाइनीज बैंकिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (OCBC) के प्रीशियस मेटल्स स्ट्रैटेजिस्ट क्रिस्टोफर वोंग का मानना है कि सोने में दोबारा बड़ी तेजी लौटने के लिए बाजार को तीन में से किसी एक बड़े बदलाव का इंतजार करना होगा
- वास्तविक बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) में गिरावट आए।
- अमेरिकी डॉलर कमजोर होना शुरू हो।
- फेडरल रिजर्व अपने सख्त रुख को नरम करे और ब्याज दरों में कटौती का संकेत दे।
निष्कर्ष: जब तक इन तीनों कारकों में से कोई एक सकारात्मक मोड़ नहीं लेता, तब तक सोने की कीमतें एक सीमित दायरे में ही कारोबार करती रहेंगी और पुराने रिकॉर्ड स्तरों को छूना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है। खरीदारों के लिए यह खरीदारी का एक बेहतरीन मौका हो सकता है, लेकिन निवेशकों को अभी फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है।











