मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- दूरी होगी कम: बुलेट ट्रेन के जरिए दिल्ली से पटना का सफर महज 4 घंटे 41 मिनट में तय होगा।
- बजट का धमाका: बिहार में रेल विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित।
- भविष्य का विस्तार: पटना-दिल्ली कॉरिडोर को आगे चलकर सिलीगुड़ी तक बढ़ाने की योजना।
- मेक इन इंडिया की धूम: मढ़ौरा में बना 51वां लोकोमोटिव इंजन अफ्रीकी देश ‘गिनी’ को होगा एक्सपोर्ट।
- स्टेशन का कायाकल्प: पटना के हार्डिंग पार्क क्षेत्र में बनेगा 5 नए प्लेटफॉर्म वाला अत्याधुनिक स्टेशन।
भूमिका: बिहार के रेल नेटवर्क में ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत
पटना/नई दिल्ली:
बिहार के रेल यात्रियों और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि बिहार की राजधानी पटना को जल्द ही देश के हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद, दिल्ली और पटना के बीच की दूरी सिमट जाएगी और यात्री महज 4 घंटे 41 मिनट में अपना सफर पूरा कर सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत इस योजना पर तेजी से काम आगे बढ़ रहा है।
रेल मंत्री ने बिहार के लिए 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के रेल बजट और राज्य में चल रही 1.15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की जानकारी देते हुए बिहार के औद्योगिक और सामाजिक विकास को एक नई दिशा देने का संकल्प जताया है।
दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी-पटना बुलेट ट्रेन कॉरिडोर: समय की होगी भारी बचत
पटना से छपरा रवाना होने के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पिछले रेल बजट में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली से लखनऊ और वाराणसी होते हुए पटना तक बुलेट ट्रेन चलाने का नीतिगत निर्णय लिया था।
वर्तमान में दिल्ली से पटना का सफर तय करने में एक्सप्रेस ट्रेनों को 12 से 17 घंटे का समय लगता है। लेकिन बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के तैयार होने के बाद यह समय घटकर 5 घंटे से भी कम रह जाएगा।
सिलीगुड़ी तक होगा विस्तार: रेल मंत्री ने एक और बड़ी खुशखबरी देते हुए बताया कि भविष्य में इस बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का विस्तार सिर्फ पटना तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे आगे बढ़ाते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक ले जाया जाएगा। इससे पूरे पूर्वोत्तर भारत (North-East India) की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
अहमदाबाद-मुंबई प्रोजेक्ट के अनुभव का मिलेगा फायदा
देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना (अहमदाबाद-मुंबई कॉरिडोर) का जिक्र करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का काम अंतिम चरण में है और अगले वर्ष तक यह रूट पूरी तरह तैयार हो जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के दौरान भारतीय इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और कार्यबलों ने जो विश्वस्तरीय अनुभव और तकनीकी क्षमता हासिल की है, उसका सीधा उपयोग अब दिल्ली-पटना कॉरिडोर सहित देश के अन्य हिस्सों में बुलेट ट्रेन नेटवर्क के विस्तार के लिए किया जाएगा। इससे आगामी परियोजनाओं की गति और सटीकता दोनों में इजाफा होगा।
बिहार के लिए ₹10,000 करोड़ का बजट और ₹1.15 लाख करोड़ की योजनाएं
बिहार में रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह मुस्तैद है। रेल मंत्री ने बताया कि:
- बजट आवंटन: बिहार के रेल विकास के लिए इस बार 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऐतिहासिक बजट उपलब्ध कराया गया है।
- चालू परियोजनाएं: वर्तमान में राज्य के भीतर लगभग 1.15 लाख करोड़ रुपये की विभिन्न रेल परियोजनाओं (जैसे दोहरीकरण, आधुनिकीकरण और नई लाइनें) पर तेजी से काम चल रहा है।
- हार्डिंग पार्क में नया टर्मिनल: पटना में लगातार बढ़ते रेल यातायात और यात्रियों के दबाव को देखते हुए पटना के हार्डिंग पार्क क्षेत्र में 5 नए प्लेटफॉर्म वाला एक अत्याधुनिक रेलवे स्टेशन (सैटेलाइट टर्मिनल) विकसित किया जा रहा है।
- इसके अलावा फतुहा सहित बिहार के कई अन्य महत्वपूर्ण रेल खंडों पर नई परियोजनाओं का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
नई ट्रेनों की सौगात और रूट का विस्तार
त्योहारों और आम दिनों में दिल्ली-बिहार रूट पर यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेल मंत्री ने कई नई ट्रेनों का भी ऐलान किया:
- छपरा से आनंद विहार टर्मिनस (दिल्ली): इस रूट पर एक नई साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन की शुरुआत की जा रही है।
- मऊ-आनंद विहार एक्सप्रेस: इस ट्रेन के परिचालन मार्ग का विस्तार अब वाराणसी सिटी तक कर दिया गया है।
- दोहरीघाट-औंड़िहार मेमू (MEMU) ट्रेन: स्थानीय यात्रियों की सुविधा के लिए इस ट्रेन के रूट को भी अब वाराणसी सिटी तक बढ़ा दिया गया है।
’मेक इन इंडिया’ की बड़ी कामयाबी: मढ़ौरा से गिनी एक्सपोर्ट होगा 51वां रेल इंजन
बिहार अब सिर्फ रेल कनेक्टिविटी में ही नहीं, बल्कि भारी औद्योगिक विनिर्माण (Industrial Manufacturing) में भी वैश्विक पटल पर चमक रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और बिहार के मुख्यमंत्री मढ़ौरा लोकोमोटिव फैक्ट्री में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में शामिल हुए।
यहाँ ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत निर्मित 51वें डीजल रेल इंजन (WDG4G) को हरी झंडी दिखाकर अफ्रीकी देश गिनी गणराज्य (Republic of Guinea) के लिए निर्यात (Export) किया गया। रेल मंत्री ने इसे बिहार के औद्योगिक विकास की एक बड़ी छलांग बताया। इस अवसर पर बिहार सरकार के मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल और स्थानीय सांसद राजीव प्रताप रूडी भी मौजूद रहे।
निष्कर्ष: आर्थिक और सामाजिक प्रगति को मिलेगी नई रफ्तार
दौरे के अंत में रेल मंत्री ने पटना के पाटलिपुत्र स्थित एसटीपीआई (STPI) पार्क का भी निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की।
अश्विनी वैष्णव ने दोहराया कि केंद्र सरकार का अंतिम लक्ष्य बिहार को एक आधुनिक और सुरक्षित रेल नेटवर्क, हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं से लैस करना है। जब बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, तो उद्योग बढ़ेंगे, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य के आर्थिक व सामाजिक विकास को एक नई और अभूतपूर्व गति मिलेगी।










