मुख्य बिंदु (Highlights):
- बड़ा हादसा: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (ओमान तट) के पास वाणिज्यिक पोत ‘एमटी सेट्टेबेलो’ पर अमेरिकी नौसेना बलों द्वारा हमला।
- भारतीयों पर गाज: चालक दल के 24 भारतीय सदस्यों में से 2 की मौत की पुष्टि, मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) अभी भी लापता।
- गंभीर आरोप: फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) का दावा— अमेरिकी सेना को क्रू की राष्ट्रीयता के बारे में ‘101% जानकारी’ थी।
- एक्शन में भारत: विदेश मंत्रालय (MEA) ने की हमले की कड़ी निंदा; ओमान में भारतीय दूतावास लापता नागरिकों की खोज के लिए सक्रिय।
नई दिल्ली / अंतरराष्ट्रीय डेस्क:
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के समीप ओमान तट पर एक बेहद दुखद और अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक वाणिज्यिक पोत ‘एमटी सेट्टेबेलो’ (MT Settebello) पर अमेरिकी नौसेना बलों द्वारा किए गए हमले में दो भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है। वहीं, जहाज के मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
इस गंभीर घटना के बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) ने हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। वहीं, नाविकों के संगठन ‘फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया’ (FSUI) ने अमेरिकी सेना की इस कार्रवाई पर बेहद गंभीर और तीखे सवाल खड़े किए हैं।
अमेरिकी सेना को सब पता था, फिर भी किया हमला: FSUI
इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त करते हुए फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) के महासचिव मनोज यादव ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत करते हुए कहा कि वह इस बात को मानने से पूरी तरह इनकार करते हैं कि अमेरिकी सेना को जहाज पर सवार लोगों के बारे में जानकारी नहीं थी।
मनोज यादव ने सीधे तौर पर आरोप लगाते हुए कहा, “मुझे 101 प्रतिशत यकीन है कि अमेरिकी नौसेना बलों को ठीक-ठीक पता था कि उस वाणिज्यिक जहाज पर कितने भारतीय और अन्य विदेशी नागरिक सवार थे। उनके पास क्रू की राष्ट्रीयता का पूरा डेटा था।” उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी वजह से पोत उनके निर्देशों का पालन नहीं भी कर रहा था, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत हिरासत में लिया जाना चाहिए था, न कि सीधा हमला करके निर्दोष नाविकों की जान ली जाती।
हिमाचल, यूपी और आंध्र प्रदेश से हैं प्रभावित नाविक
महासचिव मनोज यादव के मुताबिक, वर्तमान में जहाज से संचार व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो चुकी है, जिसके कारण जमीनी स्तर से संपर्क साधने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी, जो शुरुआती पुख्ता विवरण सामने आए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं।
उन्होंने बताया कि हमले का शिकार हुए और प्रभावित होने वाले तीनों नाविक भारत के अलग-अलग राज्यों से संबंध रखते हैं। लापता और मृत नाविकों में से एक हिमाचल प्रदेश, दूसरा उत्तर प्रदेश के देवरिया और तीसरा आंध्र प्रदेश का रहने वाला है। पीड़ितों के परिवारों को घटना की सूचना दे दी गई है और यूनियन लगातार सरकार के संपर्क में है।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने की कड़ी निंदा, 21 भारतीय सुरक्षित बचाए गए
इस अंतरराष्ट्रीय विवाद पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपनी त्वरित प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने ओमान तट के पास वाणिज्यिक पोत ‘एमटी सेट्टेबेलो’ पर हुए इस हमले की सख्त लहजे में मजम्मत की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है।
राहत की बात यह है कि जहाज पर कुल 24 भारतीय चालक दल (क्रू) के सदस्य सवार थे, जिनमें से 21 नाविकों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। शुरुआत में तीन नागरिक लापता बताए गए थे, जिनमें से दुर्भाग्यवश दो की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि ओमान में स्थित भारतीय दूतावास वहां के स्थानीय प्रशासन और तटीय सुरक्षा बलों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। लापता चीफ इंजीनियर को ढूंढने के लिए समुद्र में खोजी अभियान लगातार जारी है।
क्यों महत्वपूर्ण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्या है विवाद?
रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। हालिया दिनों में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के चलते इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बलों की निगरानी बहुत अधिक बढ़ गई है।
हालांकि, एक कमर्शियल कार्गो शिप पर इस तरह सीधे सैन्य कार्रवाई होना और उसमें निर्दोष कामकाजी भारतीय नागरिकों की मौत होना, आने वाले दिनों में अमेरिका और भारत के राजनयिक संबंधों के बीच एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। भारतीय अधिकारी अब ओमान सरकार से पोस्टमार्टम और कानूनी प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने की मांग कर रहे हैं ताकि मृतकों के पार्थिव शरीरों को ससम्मान भारत लाया जा सके।






