मिली जानकारी के मुताबिक, टिहरी गढ़वाल के नरेंद्र नगर पालिका चुनाव के लिए आज सुबह से ही कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान की प्रक्रिया चल रही थी. आम जनता और मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने के लिए लाइनों में खड़े थे. इसी दौरान प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल अचानक अपने दलबल के साथ मतदान केंद्र (पोलिंग बूथ) के भीतर दाखिल हो गए. मंत्री के इस तरह नियमों को दरकिनार कर मतदान कक्ष के अंदर जाने पर वहां मौजूद अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और स्थानीय लोग भड़क उठे.
UKD नेत्री प्रमिला रावत से तीखी नोंकझोक, वीडियो वायरल
जैसे ही सुबोध उनियाल मतदान कक्ष के अंदर पहुंचे, वहां मौजूद उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) की वरिष्ठ नेत्री प्रमिला रावत ने इसका कड़ा विरोध किया. प्रमिला रावत ने सीधे मंत्री से सवाल किया कि आखिर वे किस हैसियत और नियम के तहत पोलिंग बूथ के भीतर प्रवेश कर रहे हैं?
देखते ही देखते यह बहस बेहद आक्रामक हो गई. दोनों पक्षों के बीच तीखी नोंकझोक और गहमा-गहमी का माहौल बन गया. यूकेडी कार्यकर्ताओं ने मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी. पोलिंग बूथ के अंदर हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का किसी ने वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह वायरल हो रहा है. हंगामा इतना ज्यादा बढ़ गया कि माहौल को बिगड़ता देख मंत्री सुबोध उनियाल को अपने समर्थकों और दलबल के साथ बैरंग वापस लौटना पड़ा.
कांग्रेस का तीखा हमला: “सत्ता के अहंकार में डूबी है सरकार”
इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. कांग्रेस ने नरेंद्र नगर पालिका चुनाव के दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के इस आचरण की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का खुला उल्लंघन करार दिया है.
कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने मीडिया को बयान
जारी करते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा:
”लोकतंत्र में सत्ता का अहंकार कभी भी संविधान और निर्वाचन नियमों से ऊपर नहीं हो सकता. मतदान के दौरान एक कैबिनेट मंत्री द्वारा वीआईपी प्रोटोकॉल की धौंस दिखाना और निर्वाचन नियमों की सरेआम अनदेखी करते हुए मतदान केंद्र के भीतर प्रवेश करना बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला है.”
महिलाओं से अभद्रता और मोबाइल छीनने की कोशिश का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने मंत्री उनियाल पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि जब स्थानीय महिलाओं और मतदाताओं ने उनके इस असंवैधानिक कदम पर आपत्ति जताई, तो मंत्री ने संयम खो दिया. उन्होंने अपनी मर्यादा भूलकर जनता के साथ बेहद आक्रामक और अभद्र व्यवहार किया.
दसौनी ने आरोप लगाया कि विरोध कर रही स्थानीय महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और वहां मौजूद लोगों के मोबाइल फोन तक छीनने का प्रयास किया गया, ताकि घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग को रोका जा सके. कांग्रेस ने साफ कहा कि अगर सत्ता के शीर्ष पर बैठे जिम्मेदार मंत्री ही कानून और चुनाव आयोग के नियमों की धज्जियां उड़ाएंगे, तो आम जनता से नियमों के पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
लोकतंत्र के लिए घातक है ऐसी कोशिशें: विपक्ष
उत्तराखंड की राजनीतिक पार्टियों का मानना है कि लोकतंत्र में ‘मतदान और मतदाता’ ही सर्वोपरि होते हैं, न कि कोई मंत्री या रसूखदार पदाधिकारी. चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने, पोलिंग बूथ के अंदर जाकर दबाव बनाने या मतदाताओं को डराने की किसी भी कोशिश को देवभूमि के लोकतंत्र के लिए बेहद घातक माना जाना चाहिए.
राज्य निर्वाचन आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग
इस पूरे बवाल के बाद अब यह मामला पूरी तरह से कानूनी और राजनीतिक रंग ले चुका है. उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) से इस पूरे मामले का तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है. विपक्ष का कहना है कि पोलिंग बूथ के सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को आधार बनाकर इस मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए, ताकि चुनाव की शुचिता बरकरार रह सके.
अब देखना यह होगा कि इस पूरे सियासी घमासान और विपक्षी घेराबंदी पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल या सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तरफ से क्या आधिकारिक सफाई सामने आती है. लेकिन इस घटना ने नरेंद्र नगर से लेकर देहरादून तक की सियासी हलचल को जरूर तेज कर दिया है.










