मुख्य बिंदु:
- कहाँ हुआ हादसा: सूरत का वराछा इलाका, शुगर मार्केट के पास स्थित ‘रति ज्वैलर्स’।
- वजह: केमिकल वेस्ट (ETP) टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस का रिसाव।
- बड़ी लापरवाही: बिना किसी सेफ्टी गियर (सुरक्षा उपकरणों) के टैंक में उतारे गए थे मजदूर।
- जांच: पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ का मामला दर्ज किया, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई।
सूरत (गुजरात):
गुजरात के डायमंड सिटी सूरत से एक बेहद हृदयविदारक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। वराछा इलाके में स्थित एक ज्वेलरी फैक्ट्री के एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) यानी केमिकल युक्त वेस्ट वाटर टैंक की सफाई करने उतरे चार लोगों की जहरीली गैस की चपेट में आने से दम घुटने के कारण मौत हो गई। मृतकों में तीन मजदूर और एक फैक्ट्री का सुपरवाइजर शामिल है।
प्रारंभिक जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री प्रबंधन और ठेकेदार की घोर लापरवाही के कारण इन मासूमों की जान गई, क्योंकि सफाई के दौरान सुरक्षा से जुड़े बुनियादी प्रोटोकॉल का भी पालन नहीं किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
यह दर्दनाक वाकया वराछा के शुगर मार्केट (खंड बाजार) के पास स्थित ‘रति ज्वैलर्स’ नाम की एक इंडस्ट्रियल यूनिट का है। इस फैक्ट्री में सोने और चांदी के गहनों की मैन्युफैक्चरिंग और सफाई का काम होता है। गहनों की घिसाई और पॉलिशिंग के बाद निकलने वाले जहरीले और रासायनिक पानी को प्रोसेस करने के लिए यहाँ एक ETP (Effluent Treatment Plant) प्लांट बनाया गया है, जिसके सेफ्टी टैंक को हर दो महीने में साफ किया जाता है।
रोजाना की तरह आज सुबह भी इस टैंक की नियमित सफाई का काम होना था। सुबह करीब 10 बजे ठेकेदार के तीन मजदूर और फैक्ट्री के एक सुपरवाइजर टैंक की सफाई के लिए उसमें उतरे। लेकिन जैसे ही वे टैंक के भीतर पहुंचे, वहां पहले से जमा अत्यधिक जहरीली गैसों (संभावित रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड) ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। गैस का असर इतना तेज था कि चारों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे चंद मिनटों में बेहोश होकर वहीं गिर पड़े।
फायर ब्रिगेड को दी गई गुमराह करने वाली सूचना!
इस घटना में एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है। सुबह 10:22 बजे जब फायर डिपार्टमेंट को कॉल किया गया, तो उन्हें केवल एक व्यक्ति के टैंक में फंसे होने की सूचना दी गई थी। जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम बिना वक्त गंवाए कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गई।
जब दमकल कर्मियों ने टैंक के भीतर उतरकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, तो वे भी सन्न रह गए। टैंक के अंदर एक नहीं, बल्कि चार लोग गंभीर और अचेत अवस्था में पड़े हुए थे। फायर ब्रिगेड की टीम ने काफी मशक्कत और सूझबूझ के साथ चारों को बाहर निकाला।
डिविजनल फायर ऑफिसर रंजीतसिंह खाडिया का बयान:
“हमें केवल एक व्यक्ति के गिरने की सूचना मिली थी, लेकिन मौके पर जांच करने पर पता चला कि चार लोग अंदर फंसे थे। जब हमारी टीम ने उन्हें बाहर निकाला, तो चारों पूरी तरह अचेत (बेहोश) थे। सबसे गंभीर बात यह थी कि उनके शरीर पर एक भी सुरक्षा उपकरण (सेफ्टी गियर) नहीं था। घटना स्थल के आसपास भी हमें कोई सेफ्टी इक्विपमेंट नहीं मिला।”
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने घोषित किया मृत
टैंक से निकाले जाने के बाद चारों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत 108 एम्बुलेंस और फायर विभाग के वाहनों की मदद से नजदीकी SMIMER (स्मीयर) अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उनकी जांच की, लेकिन दुर्भाग्य से तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने चारों को मृत घोषित कर दिया।
मजदूरों की मौत की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर और फैक्ट्री के बाहर चीख-पुकार मच गई। मृतकों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है।
सुरक्षा नियमों की सरेआम धज्जियां, पुलिस करेगी विस्तृत जांच
इस बेहद संवेदनशील मामले पर सूरत के DCP आलोक कुमार ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया है। शुरुआती जांच से यह साफ जाहिर होता है कि बिना किसी सेफ्टी प्रोटोकॉल के इन मजदूरों को मौत के कुएं में धकेल दिया गया।
DCP आलोक कुमार के अनुसार:
- एक्सीडेंटल डेथ का मामला दर्ज: फिलहाल पुलिस ने दुर्घटना से मौत का मामला दर्ज कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
- लापरवाही की जांच: फैक्ट्री मालिक और कॉन्ट्रैक्टर (ठेकेदार) की भूमिका की गहन जांच की जा रही है कि उन्होंने बिना गैस मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर और सेफ्टी बेल्ट के मजदूरों को टैंक में कैसे जाने दिया।
- जिम्मेदारी तय होगी: इस पूरे मामले की एक विस्तृत टेक्निकल जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (IPC/BNS के तहत) का कड़ा मामला दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एक बार फिर उठा ‘मैनुअल स्कैवेंजिंग’ और सुरक्षा पर सवाल
यह कोई पहली घटना नहीं है जब किसी सेप्टिक या केमिकल टैंक की सफाई के दौरान मजदूरों की जान गई हो। सरकारी गाइडलाइंस के मुताबिक, किसी भी केमिकल या सीवेज टैंक में इंसानों को उतारने से पहले जहरीली गैस की जांच करना और सुरक्षा उपकरण पहनना अनिवार्य है। लेकिन सूरत के इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चंद पैसों की बचत और लापरवाही के कारण आज भी गरीब मजदूरों की जान को जोखिम में डाला जा रहा है।
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अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में ‘रति ज्वैलर्स’ के प्रबंधन और जिम्मेदार ठेकेदार पर क्या ठोस कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों पर लगाम लगाई जा सके।










