पटना। बिहार के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। सोमवार दोपहर अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में अचानक भीषण आग लग गई। जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय विभाग में छात्रों की परीक्षा चल रही थी।
आग की लपटें और काले धुएं का गुबार देखकर परिसर में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में परीक्षा दे रहे छात्रों, डॉक्टरों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। सूचना मिलने के बाद दमकल की पांच से अधिक गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक विभाग में रखे कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, जीवन रक्षक दवाएं और महंगे उपकरण जलकर खाक हो चुके थे।
परीक्षा के अंतिम समय में उठीं लपटें, मची भगदड़
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार को माइक्रोबायोलॉजी विभाग में दो शिफ्टों में परीक्षाओं का आयोजन किया जा रहा था। परीक्षा अपने अंतिम दौर में थी, तभी विभाग के एक हिस्से से अचानक गाढ़ा काला धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते धुएं ने पूरे कॉरिडोर को अपनी चपेट में ले लिया। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों और छात्रों ने जैसे ही आग की लपटें देखीं, वहां चीख-पुकार मच गई।
लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। गनीमत यह रही कि समय रहते सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान होने से टल गया। स्थानीय लोगों और अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों ने शुरुआत में अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग की विभीशिका को देखते हुए तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया।
एचओडी का बयान: धुआं दिखते ही काटी गई बिजली
घटना के संबंध में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. प्रत्युल नंदन ने बताया:
”परीक्षा समाप्त होने ही वाली थी कि तभी विभाग के एक कोने से धुआं उठता दिखाई दिया। स्थिति की गंभीरता और छात्रों की सुरक्षा को भांपते हुए हमने सबसे पहले पूरे विभाग की बिजली सप्लाई को काट दिया। इसके बाद उपलब्ध अग्निशमन उपकरणों से आग पर काबू पाने की कोशिश की गई, लेकिन आग बहुत तेजी से फैल गई। इसके बाद तुरंत फायर ब्रिगेड को इसकी सूचना दी गई।”
डॉ. नंदन ने दुख जताते हुए कहा कि इस अगलगी में विभाग के कई अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज, शोध कार्य से जुड़े पेपर्स, कीमती दवाइयां, टेस्टिंग केमिकल्स और लाखों रुपये का फर्नीचर पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया है। नुकसान का सटीक आकलन जांच के बाद ही मिल पाएगा।
शॉर्ट-सर्किट की आशंका, फायर फाइटिंग सिस्टम पर सवाल
मामले की जानकारी देते हुए जिला फायर कमांडेंट रितेश पांडेय ने बताया कि फायर ब्रिगेड के कंट्रोल रूम को दोपहर लगभग 2:10 बजे पीएमसीएच में आग लगने की सूचना मिली थी। चूंकि पीएमसीएच एक बेहद संवेदनशील और बड़ा परिसर है, इसलिए सुरक्षा के दृष्टिकोण से वहां पहले से ही एक फायर टेंडर (दमकल की गाड़ी) तैनात रहती है। सूचना मिलते ही उस गाड़ी को तुरंत काम पर लगाया गया, जबकि मुख्यालय से छह अन्य बड़ी गाड़ियों को तुरंत मौके के लिए रवाना किया गया।
फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई के कारण आग को अस्पताल के अन्य वार्डों और विभागों में फैलने से रोक लिया गया। जिला फायर कमांडेंट के अनुसार, प्राथमिक जांच में आग लगने की मुख्य वजह शॉर्ट-सर्किट मानी जा रही है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन और फायर विभाग की एक संयुक्त टीम इस मामले की विस्तृत जांच करेगी कि आखिर चूक कहां हुई।
घटना का विवरण
मुख्य बिंदु
स्थान
माइक्रोबायोलॉजी विभाग, PMCH, पटना
समय
सोमवार दोपहर लगभग 2:10 बजे
प्रभावित कार्य
दो शिफ्टों में चल रही परीक्षाएं बाधित
नुकसान
महत्वपूर्ण दस्तावेज, दवाइयां, केमिकल्स और फर्नीचर खाक
बचाव कार्य
5 से अधिक दमकल गाड़ियों द्वारा काबू
दो महीने में तीसरी घटना: सुरक्षा व्यवस्थाओं की खुली पोल
पीएमसीएच जैसे अति-संवेदनशील और वीवीआईपी अस्पताल में आग लगने की यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले दो महीनों के भीतर अस्पताल परिसर में अगलगी की यह तीसरी बड़ी घटना है, जिसने अस्पताल प्रशासन की तैयारियों और दावों की पोल खोल कर रख दी है:
- अप्रैल माह की घटना: अप्रैल में पीएमसीएच के पैथोलॉजी विभाग में इसी तरह भीषण आग लगी थी, जिसमें कई आधुनिक जांच मशीनें, मरीजों के रिकॉर्ड और महत्वपूर्ण दस्तावेज जल गए थे। उस समय भी आग का कारण शॉर्ट-सर्किट ही बताया गया था।
- हालिया दूसरी घटना: इसके कुछ दिनों बाद ही स्त्री एवं प्रसूति विभाग (गायनी विभाग) के पुराने भवन में भी आग लगने का मामला सामने आया था, जिससे प्रसूता महिलाओं और नवजात बच्चों की जान पर बन आई थी।
- सोमवार की घटना: अब माइक्रोबायोलॉजी विभाग में हुई इस तीसरी घटना ने अस्पताल प्रबंधन के सुरक्षा ऑडिट पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
मरीजों, डॉक्टरों और कर्मचारियों में पनपा डर का माहौल
बार-बार हो रहे इन हादसों के कारण अब पीएमसीएच में काम करने वाले डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों, नर्सिंग स्टाफ और यहाँ इलाज कराने आने वाले राज्यभर के मरीजों व उनके परिजनों में डर का माहौल व्याप्त हो गया है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में कोई बड़ा और भयावह हादसा हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय:
स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों और फायर सेफ्टी ऑडिटर्स का मानना है कि पीएमसीएच जैसे पुराने और विशाल अस्पताल में समय-समय पर ‘फायर सेफ्टी ऑडिट’ होना अनिवार्य है। अस्पताल की पुरानी वायरिंग को बदलने, लोड मैनेजमेंट की जांच करने और हर विभाग में आधुनिक ऑटोमैटिक फायर स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने की तत्काल आवश्यकता है। इसके साथ ही आपातकालीन सुरक्षा उपायों और एग्जिट रूट्स (निकासी द्वारों) को दुरुस्त करना होगा, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
फिलहाल, अस्पताल प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन देखना यह होगा कि क्या इस बार महकमा केवल जांच तक सीमित रहता है या सुरक्षा के ठोस पुख्ता इंतजाम भी किए जाते हैं।










