देहरादून:
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के एक नामचीन और पॉश इलाके से नैतिकता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। शहर के किशन नगर एक्सटेंशन क्षेत्र में स्थित एक प्ले ग्रुप स्कूल के परिसर के भीतर पिछले कई महीनों से चल रहे देह व्यापार (सेक्स रैकेट) का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस घटना ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि जिस परिसर को बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए सुरक्षित माना जाता था, उसी के पिछले हिस्से में अनैतिक कारोबार फल-फूल रहा था।
पार्षद और क्षेत्रवासियों की मुस्तैदी से खुला राज
घटना का खुलासा तब हुआ जब किशन नगर एक्सटेंशन के स्थानीय निवासियों को स्कूल परिसर में रात के समय संदिग्ध गतिविधियों और अज्ञात युवकों की आवाजाही पर संदेह हुआ। क्षेत्रवासियों ने इसकी सूचना स्थानीय भाजपा पार्षद नंदिनी शर्मा को दी। पार्षद के मौके पर पहुंचते ही स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पार्षद ने स्कूल के पिछले हिस्से में बने कमरों की जांच की तो वहां चल रहे गोरखधंधे की परतें खुलने लगीं।
सूचना मिलते ही हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में मौके पर एकत्र हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और स्थानीय पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला।
छापेमारी और गिरफ्तारी: राजस्थान के दो युवक हिरासत में
पुलिस की छापेमारी के दौरान स्कूल परिसर के पिछले हिस्से में किराए पर लिए गए कमरों से तीन युवतियों को मुक्त कराया गया। इसके साथ ही, इस अनैतिक व्यापार को संचालित करने वाले दो मुख्य आरोपियों, आशीष पांडेय और जंग बहादुर (दोनों राजस्थान निवासी), को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे यहां से देह व्यापार का नेटवर्क चला रहे थे।
कमरों की तलाशी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री, शराब की बोतलें, दवाएं, कंडोम और संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (पेन ड्राइव व मेमोरी कार्ड) बरामद हुए हैं। पुलिस ने एक डायरी भी जब्त की है, जिसमें ग्राहकों के नाम और लेन-देन का पूरा हिसाब दर्ज है।
HIV पॉजिटिव कार्ड मिलने से मचा हड़कंप
इस पूरी कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पुलिस ने युवतियों के सामान की तलाशी ली। सूत्रों के अनुसार, मुक्त कराई गई युवतियों में से एक के बैग से अस्पताल का उपचार कार्ड बरामद हुआ है, जिससे उसके HIV पॉजिटिव होने की बात सामने आई है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन युवती ने स्वयं के बीमार होने की बात स्वीकार की है। इस खुलासे के बाद उन लोगों में दहशत का माहौल है जो पिछले कुछ महीनों में इस रैकेट के संपर्क में आए थे।
मजबूरी का फायदा उठाकर धकेला दलदल में
पुलिस जांच में पता चला है कि बचाई गई युवतियां मेरठ, मुजफ्फरनगर और दिल्ली की रहने वाली हैं। ये युवतियां आर्थिक तंगी के कारण नौकरी की तलाश में देहरादून आई थीं, जहां इन आरोपियों ने उन्हें झांसा देकर और उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर जिस्मफरोशी के दलदल में धकेल दिया। पिछले छह महीनों से यह रैकेट स्कूल की आड़ में सुरक्षित तरीके से चलाया जा रहा था, ताकि किसी को शक न हो।
प्रशासनिक रुख और सुरक्षा पर सवाल
पार्षद नंदिनी शर्मा ने इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि स्कूल जैसे पवित्र स्थान पर इस तरह की गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर भी जांच की मांग की है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या स्कूल प्रबंधन को इस गतिविधि की जानकारी थी या आरोपियों ने उन्हें धोखे में रखकर कमरा किराए पर लिया था।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है और बरामद डायरी के आधार पर ग्राहकों के नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।









