नैनीताल (कालाढूंगी): देवभूमि उत्तराखंड के शांत वादियों से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के बढ़ते जाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नैनीताल जिले के कालाढूंगी क्षेत्र में ऑनलाइन सट्टे के दलदल में फंसकर एक 17 वर्षीय किशोर ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतक की पहचान जगदीश बिष्ट के रूप में हुई है, जो गांव के सरपंच धन सिंह बिष्ट का पुत्र था।
इस घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि युवाओं में बढ़ती सट्टेबाजी की लत और उससे होने वाले मानसिक उत्पीड़न के खतरनाक पहलू को भी उजागर किया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जगदीश बिष्ट कोटाबाग स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र था। वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ एक सामान्य जीवन जी रहा था, लेकिन पर्दे के पीछे वह ‘ऑनलाइन सट्टे’ (Online Betting) के मकड़जाल में फंस चुका था। बताया जा रहा है कि सट्टे में बड़ी रकम हारने के बाद वह गहरे मानसिक तनाव में था।
घटना वाले दिन, जगदीश सुबह घर से वॉशरूम जाने की बात कहकर निकला था। जब वह काफी देर तक वापस नहीं लौटा, तो परिजनों को चिंता हुई। तलाश करने पर वह रास्ते में बेहोशी की हालत में मिला। आनन-फानन में उसे स्वास्थ्य केंद्र कोटाबाग ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। जहर के सेवन के कारण उसकी मृत्यु हो गई।
दोस्त पर मानसिक प्रताड़ना और धमकी का आरोप
यह मामला केवल सट्टे में पैसे हारने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ‘क्रिमिनल बुलीइंग’ का एंगल भी सामने आया है। मृतक के पिता और सरपंच धन सिंह बिष्ट ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जगदीश का उसके दोस्तों के साथ पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था।
आरोप है कि अभय गुप्ता नामक एक युवक जगदीश को जुआ खेलने के लिए मजबूर करता था। जब जगदीश पैसे हार गया, तो आरोपित उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगा। परिजनों का कहना है कि जगदीश ने अस्पताल में दम तोड़ने से पहले भी अपने दोस्त द्वारा दी जा रही धमकियों और उत्पीड़न के बारे में बताया था।
आखिरी वीडियो में बयां किया दर्द
मौत को गले लगाने से पहले जगदीश ने एक वीडियो भी बनाया था, जो अब पुलिस के लिए एक बड़ा सबूत बन गया है। इस वीडियो में जगदीश ने रोते हुए अपने दोस्त पर मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। वीडियो से साफ झलकता है कि वह किस कदर डरा हुआ और लाचार महसूस कर रहा था। एक मेधावी छात्र का इस तरह खौफ के साये में टूट जाना समाज के लिए एक चेतावनी है।
पुलिसिया कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मामले की संजीदगी को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। कालाढूंगी पुलिस का कहना है कि मृतक के पास से मिले वीडियो और परिजनों के बयानों को आधार बनाकर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार:
”आरोपित अभय गुप्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज कर ली गई है। पुलिस हर उस कड़ी को जोड़ रही है जो इस आत्महत्या के पीछे जिम्मेदार है। ऑनलाइन सट्टेबाजी के इस पूरे सिंडिकेट और उसमें शामिल अन्य लोगों की भी जांच की जाएगी।”
ऑनलाइन सट्टे का बढ़ता खतरा: एक सामाजिक बुराई
आजकल मोबाइल ऐप्स और वेबसाइट्स के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी युवाओं, खासकर किशोरों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। ‘रातों-रात अमीर बनने’ के लालच में छात्र अपनी पढ़ाई और भविष्य दांव पर लगा रहे हैं। जब वे हार जाते हैं, तो उन पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है, जिससे अपराधी प्रवृत्ति के लोग उन्हें ब्लैकमेल करना और डराना शुरू कर देते हैं।
विशेषज्ञों की राय:
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किशोरावस्था में बच्चे अपनी समस्याओं को परिजनों से साझा करने में हिचकिचाते हैं। ऐसे में वे गलत कदम उठा लेते हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों की मोबाइल एक्टिविटी और उनके व्यवहार में आ रहे बदलावों पर नजर रखें।
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निष्कर्ष
कालाढूंगी की यह घटना उत्तराखंड के लिए एक वेक-अप कॉल है। एक होनहार छात्र, जो तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर अपना भविष्य संवार सकता था, आज एक अवैध खेल और गलत संगत की भेंट चढ़ गया। सरपंच धन सिंह बिष्ट के घर में छाया मातम पूरे प्रदेश को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या तकनीक का यह रूप हमारे बच्चों को निगल रहा है?
अब सबकी नजरें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या जगदीश को न्याय मिलेगा और क्या प्रशासन इन अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी के प्लेटफार्म्स पर नकेल कस पाएगा?








