देहरादून/उत्तरकाशी।
उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध ‘चारधाम यात्रा’ का आज अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर विधिवत शुभारंभ हो गया है। हिमालय की ऊंची चोटियों पर स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट खुलने के साथ ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं का छह महीने का लंबा इंतजार समाप्त हो गया है। कपाट खुलने से पहले ही हजारों भक्त उत्तरकाशी पहुंच चुके थे, जिससे पूरी घाटी ‘जय माँ गंगे’ और ‘जय माँ यमुना’ के उद्घोष से गुंजायमान हो रही है।
शुभ मुहूर्त में खुले मंदिरों के द्वार
आज दोपहर के विशेष शुभ मुहूर्त में दोनों धामों के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए:
- गंगोत्री धाम: माँ गंगा के मंदिर के कपाट दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर खोले गए।
- यमुनोत्री धाम: माँ यमुना के मंदिर के कपाट दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर खोले गए।
मंदिरों को कई क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। सेना के बैंड की मधुर धुन और स्थानीय लोक वाद्ययंत्रों (ढोल-दमाऊं) के बीच श्रद्धालुओं का स्वागत किया जा रहा है।
भावुक कर देने वाली विदाई: शीतकालीन गद्दी स्थलों से निकली डोलियाँ
यात्रा की शुरुआत हमेशा की तरह धार्मिक परंपराओं और भावनात्मक दृश्यों के साथ हुई।
माँ यमुना की रवानगी:
खरशाली (खुशिमठ) स्थित शीतकालीन गद्दी स्थल से माँ यमुना की उत्सव डोली, शनि देव (समेश्वर देवता) की अगुवाई में यमुनोत्री के लिए रवाना हुई। ग्रामीणों ने नम आँखों से अपनी आराध्य देवी को विदा किया। अब शीतकाल तक माँ यमुना यमुनोत्री धाम में ही विराजमान रहेंगी।
माँ गंगा का प्रस्थान:
वहीं, मुखबा (मुखिमठ) गांव से माँ गंगा की भोगमूर्ति शनिवार को ही गंगोत्री के लिए रवाना हो गई थी। ग्रामीणों ने माँ गंगा को पारंपरिक ‘फाफरे का भोग’ लगाया और छह महीने के प्रवास के लिए उन्हें धाम भेजा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: अभेद्य किले में तब्दील हुए यात्रा मार्ग
2026 की इस यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। पूरे यात्रा मार्ग को 2 सुपरजोन, 12 जोन और 30 सेक्टरों में विभाजित किया गया है।
पुलिस और सुरक्षा बल की तैनाती:
- कुल बल: 2 अपर पुलिस अधीक्षक, 5 राजपत्रित अधिकारी, 15 निरीक्षक, 135 उपनिरीक्षक और लगभग 400 हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल तैनात किए गए हैं।
- विशेष टीमें: एटीएस (ATS), बीडीएस (BDS), और एसडीआरएफ (SDRF) की कई टीमें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद हैं।
- पर्यटन पुलिस: यात्रियों की सहायता के लिए 12 पर्यटन पुलिस चौकियां बनाई गई हैं।
हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर: ‘स्वास्थ्य मित्र’ संभालेंगे मोर्चा
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पुख्ता इंतजाम किए हैं।
- विशेषज्ञ डॉक्टर: जानकीचट्टी, बड़कोट, गंगोत्री और जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की गई है।
- स्वास्थ्य मित्र: गंगोत्री में 10 और यमुनोत्री-जानकीचट्टी मार्ग पर 24 ‘स्वास्थ्य मित्र’ तैनात किए गए हैं, जो यात्रियों को त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान करेंगे।
- स्क्रीनिंग प्वाइंट: हीना और दोबाटा में स्क्रीनिंग प्वाइंट्स पर मेडिकल ऑफिसर्स यात्रियों की जांच के बाद ही उन्हें आगे भेजेंगे।
पंजीकरण और सुविधाओं की स्थिति
आज से ही हीना और दोबाटा स्क्रीनिंग पॉइंट्स पर आधिकारिक पंजीकरण (Registration) प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यात्रा मार्ग पर होटल, होमस्टे और दुकानें पूरी तरह सज चुकी हैं। स्थानीय व्यापारियों में भारी उत्साह है, क्योंकि चारधाम यात्रा राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है।
भक्तों के लिए गाइडलाइंस
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा शुरू करें और अपने साथ पर्याप्त गर्म कपड़े रखें। साथ ही, हृदय रोग या सांस की तकलीफ वाले यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे हीना और दोबाटा में अनिवार्य रूप से अपनी स्वास्थ्य जांच करवाएं।
निष्कर्ष
चारधाम यात्रा न केवल एक धार्मिक यात्रा है, बल्कि यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रमाण है। गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ ही अब केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने का इंतजार है। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी उछाल आने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय स्वयं व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहा है।






