रुद्रप्रयाग: 9 दिनों के इंतजार का दर्दनाक अंत, जंगल में मिला 5 वर्षीय मयंक का शव; सस्पेंस में मौत की गुत्थी - Doonprimenews
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रुद्रप्रयाग: 9 दिनों के इंतजार का दर्दनाक अंत, जंगल में मिला 5 वर्षीय मयंक का शव; सस्पेंस में मौत की गुत्थी

On: April 13, 2026 8:36 AM
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रुद्रप्रयाग के जंगल में सर्च ऑपरेशन के दौरान मासूम मयंक का शव बरामद करती SDRF टीम और पुलिस

​रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के शांत पर्वतीय अंचलों से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई है जिसने पूरी क्यूंजा घाटी को शोक और सन्नाटे में डुबो दिया है। जनपद के बाड़व गांव से बीते 4 अप्रैल से लापता 5 वर्षीय मासूम मयंक का शव नौ दिनों के गहन खोज अभियान के बाद रविवार को गांव से दूर घने जंगलों में बरामद हुआ। मासूम की मौत की खबर फैलते ही गांव में कोहराम मच गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

​क्या है पूरा मामला?

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​रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली क्यूंजा घाटी का बाड़व गांव पिछले एक हफ्ते से अधिक समय से सुर्खियों में था। यहां के निवासी विजय लाल और मनीषा देवी का पांच साल का बेटा मयंक 4 अप्रैल को अचानक घर के पास से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। मासूम बच्चा खेलते-खेलते कहां ओझल हो गया, इसका सुराग किसी को नहीं लगा। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो पुलिस को सूचना दी गई।

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घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए रुद्रप्रयाग पुलिस प्रशासन ने तुरंत हरकत में आते हुए मोर्चा संभाला। मासूम की तलाश के लिए पुलिस विभाग के साथ-साथ एसडीआरएफ (SDRF) और डीडीआरएफ (DDRF) की टीमों को तैनात किया गया था। पिछले नौ दिनों से रेस्क्यू टीमें, स्थानीय ग्रामीण और पुलिस बल दिन-रात जंगलों की खाक छान रहे थे। आधुनिक उपकरणों और खोजी कुत्तों की मदद भी ली गई, लेकिन घने जंगलों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सफलता हाथ नहीं लग पा रही थी।

​नौवें दिन मिली दर्दनाक सूचना

​रविवार की सुबह जब तलाशी अभियान फिर से शुरू हुआ, तो गांव से लगभग 2 से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित घने जंगल में खोजी दल को एक बच्चे का शव दिखाई दिया। नजदीक जाकर शिनाख्त की गई तो वह लापता मयंक ही था। नौ दिनों तक जिस मयंक की सुरक्षित वापसी की दुआएं मांगी जा रही थीं, उसका निर्जीव शरीर देखकर रेस्क्यू टीम के सदस्यों की भी आंखें नम हो गईं। सूचना मिलते ही पुलिस के उच्चाधिकारी मौके पर पहुंचे और शव को अपने कब्जे में लिया।

​जंगली जानवर या कुछ और? बना हुआ है सस्पेंस

​पहाड़ों में बच्चों के लापता होने के पीछे अक्सर गुलदार या अन्य जंगली जानवरों का हाथ होता है, लेकिन मयंक के मामले में कहानी कुछ अलग नजर आ रही है। वन विभाग के रेंजर हरी शंकर रावत ने मौके का मुआयना करने के बाद बताया कि प्रथम दृष्टया शव पर किसी भी जंगली जानवर के हमले के स्पष्ट निशान नहीं पाए गए हैं।

​आमतौर पर यदि कोई जंगली जानवर हमला करता है, तो संघर्ष के निशान या शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचने के संकेत मिलते हैं। ऐसे में मयंक का शव इतनी दूर जंगल में कैसे पहुंचा और उसकी मौत कैसे हुई, यह अब एक बड़ी गुत्थी बन गई है। क्या यह कोई मानवीय साजिश है या फिर मासूम रास्ता भटककर जंगल की गहराई में चला गया, पुलिस इन सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।

​गांव में मातम और दहशत का माहौल

​मयंक की मौत के बाद बाड़व गांव सहित पूरी क्यूंजा घाटी में शोक की लहर है। ग्रामीण इस बात से भी डरे हुए हैं कि अगर यह किसी अपराधी का काम है, तो क्षेत्र के अन्य बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं। पीड़ित पिता विजय लाल और मां मनीषा देवी की हालत बेहद नाजुक है; उनका इकलौता चिराग बुझ जाने से घर में अंधेरा छा गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

​पुलिस की कार्रवाई और आगामी कदम

​रुद्रप्रयाग पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, मौत के सही कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा।

​पुलिस अधिकारियों का कहना है:

​”हमने शव को बरामद कर लिया है। चूंकि मामला संदिग्ध लग रहा है, इसलिए हम फॉरेंसिक एंगल से भी जांच कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। हम ग्रामीणों से शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग की अपील करते हैं।”

​सुरक्षा पर उठे सवाल

​इस घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में बच्चों की सुरक्षा और जंगली इलाकों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर वन विभाग और पुलिस पहले से अधिक सतर्क रहते, तो शायद मासूम की जान बचाई जा सकती थी।

​फिलहाल, पूरा जिला मयंक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है ताकि यह साफ हो सके कि उस मासूम के साथ उस काली दोपहर को आखिर क्या हुआ था।

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