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देहरादून: कर्ज के दलदल में फंसे प्रॉपर्टी और सीमेंट कारोबारी ने दी जान, ओल्ड राजपुर में पसरा मातम

On: March 22, 2026 6:11 AM
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देहरादून के दून अस्पताल के बाहर पुलिस की जांच और अमरीश गोयल आत्महत्या मामला

देहरादून, उत्तराखंड

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। शहर के ओल्ड राजपुर क्षेत्र में रहने वाले एक प्रतिष्ठित प्रॉपर्टी और भवन निर्माण सामग्री (सीमेंट-सरिया) के कारोबारी ने कर्ज के भारी बोझ से परेशान होकर जहरीला पदार्थ गटक लिया। उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और व्यापारिक जगत में भी शोक की लहर है।

देर रात घटी घटना, अस्पताल पहुंचने से पहले ही टूटी सांसें

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान 48 वर्षीय अमरीश गोयल निवासी ओल्ड राजपुर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार की देर रात अमरीश गोयल ने अपने घर पर अचानक कोई जहरीला पदार्थ खा लिया। जब उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, तो परिजनों को घटना का पता चला। आनन-फानन में उनकी पत्नी और अन्य स्वजन उन्हें उपचार के लिए कोरोनेशन अस्पताल लेकर पहुंचे।

अमरीश की गंभीर स्थिति को देखते हुए कोरोनेशन अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय (दून अस्पताल) रेफर कर दिया। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था। दून अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उनका परीक्षण किया और उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की।

कर्ज का बोझ बना जान का दुश्मन

राजपुर थाना प्रभारी प्रदीप रावत के नेतृत्व में हुई प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि अमरीश गोयल पिछले लंबे समय से आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज के कारण मानसिक तनाव में थे। वह प्रॉपर्टी डीलिंग के साथ-साथ सीमेंट और सरिया का बड़ा कारोबार भी संभालते थे। सूत्रों के अनुसार, बाजार में उनकी काफी उधारी थी और उन पर बैंक व अन्य स्रोतों से लिया गया कर्ज लगातार बढ़ रहा था।

राजपुर पुलिस ने बताया कि “जांच में प्रथम दृष्टया यह बात निकलकर आई है कि व्यापार में घाटे और कर्ज की अदायगी न कर पाने के कारण अमरीश काफी परेशान चल रहे थे। इसी हताशा में उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।”

परिवार और व्यापारिक जगत में शोक

अमरीश गोयल के निधन की खबर जैसे ही ओल्ड राजपुर और आसपास के क्षेत्रों में फैली, वहां लोगों का जमावड़ा लग गया। मृतक के घर पर चीख-पुकार मची हुई है। स्वजनों का कहना है कि अमरीश स्वभाव से बेहद मृदुभाषी थे और अपने काम के प्रति समर्पित थे, लेकिन कर्ज के दबाव ने उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ दिया था। व्यापारिक संगठनों ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त किया है। उनका कहना है कि प्रॉपर्टी बाजार में मंदी और भुगतान में देरी की वजह से कई छोटे-बड़े व्यापारी इस समय भारी दबाव में हैं।

पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम

शनिवार सुबह पुलिस ने शव का पंचनामा (पंचायतनामा) भरने की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेजा गया। शनिवार दोपहर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अमरीश गोयल का पार्थिव शरीर उनके परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस अब उन पहलुओं की भी जांच कर रही है कि क्या कर्ज की वसूली के लिए उन पर कोई मानसिक दबाव बनाया जा रहा था या किसी विशेष व्यक्ति द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा था।

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विशेषज्ञ की राय: आर्थिक तनाव और आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि व्यापारिक उतार-चढ़ाव में अक्सर व्यक्ति खुद को अकेला महसूस करने लगता है। देहरादून में हाल के वर्षों में कर्ज के कारण खुदकुशी के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • आर्थिक समस्या होने पर उसे परिवार या भरोसेमंद मित्रों के साथ साझा करना चाहिए।
  • ‘दिवालियापन’ या ‘कर्ज’ को जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक कठिन समय की तरह देखना चाहिए।
  • प्रशासन और बैंकों को भी कर्ज वसूली की प्रक्रियाओं में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

निष्कर्ष

अमरीश गोयल की मौत ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है।

ओल्ड राजपुर की गलियों में आज सन्नाटा पसरा है। पुलिस मामले की फाइल तैयार कर रही है, लेकिन एक सवाल अभी भी खड़ा है—क्या आर्थिक सफलता ही जीवन का एकमात्र पैमाना है? कर्ज से घिरे होने पर मौत को गले लगाना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह पीछे रह गए अपनों के लिए उम्र भर का दुख बन जाता है।

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