अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को मिली ‘इच्छामृत्यु’ की अनुमति, भारत में पहली बार लागू हुआ पैसिव यूथेनेशिया

On: March 11, 2026 7:53 AM
Follow Us:
एक अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए हरीश राणा, जो मशीनों और ट्यूबों के सहारे हैं। उनके पिता और एक नर्स उनके पास खड़े हैं। बिस्तर के पास सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और मेडिकल फाइलों के दस्तावेज़ रखे हुए हैं।

नई दिल्ली। भारत के न्यायिक इतिहास में आज एक ऐसा अध्याय लिखा गया जो मानवीय संवेदनाओं और कानून के बीच के बारीक संतुलन को दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 वर्षों से ‘परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट’ (PVS) में जीवन बिता रहे 32 वर्षीय हरीश राणा को ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (Passive Euthanasia) यानी निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है। यह देश का पहला मामला है जहाँ 2018 के ‘कॉमन कॉज’ फैसले के दिशानिर्देशों को धरातल पर उतारते हुए किसी मरीज का लाइफ सपोर्ट हटाने का आदेश दिया गया है।


2013 की वह रात जिसने सब कुछ बदल दिया

गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा कभी एक मेधावी और ऊर्जावान युवक थे। उनकी जिंदगी में अंधेरा तब छाया जब 2013 में चंडीगढ़ में अपने पीजी की चौथी मंजिल से गिरने के कारण उन्हें गंभीर ब्रेन इंजरी हुई। इस हादसे ने उन्हें पूरी तरह से बिस्तर पर ला दिया। पिछले 13 वर्षों से हरीश 100 फीसदी क्वाड्रिप्लेजिक (हाथ-पैर काम न करना) स्थिति में थे। वह न बोल सकते थे, न चल सकते थे; उनकी सांसें ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब के जरिए और पोषण पेट में लगी पीईजी (PEG) ट्यूब के जरिए चल रहा था।
पिता की पीड़ा और कानूनी लड़ाई
हरीश के पिता ने अपने जवान बेटे को तिल-तिल मरते देखा। बिस्तर पर पड़े-पड़े हरीश के शरीर पर गहरे ‘बेड सोर्स’ हो गए थे। जब डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि रिकवरी की कोई भी गुंजाइश नहीं बची है, तब एक मजबूर पिता ने अपने बेटे के लिए ‘सम्मानजनक मौत’ की गुहार लगाई।


2024 में दिल्ली हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने एम्स (AIIMS) के विशेषज्ञों का एक मेडिकल बोर्ड गठित किया। बोर्ड की रिपोर्ट ने अदालत को झकझोर कर रख दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि हरीश का इलाज जारी रखना केवल उसकी जैविक उपस्थिति (Biological Existence) को खींचना है, जिससे उसे कोई लाभ नहीं हो रहा।
कोर्ट की टिप्पणी: ‘गरिमा के साथ मरना मौलिक अधिकार’


सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 2018 के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि ‘गरिमा के साथ मरना’ अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का ही हिस्सा है। जस्टिस पारदीवाला ने मेडिकल रिपोर्ट पर दुख जताते हुए कहा कि मरीज को इस असहनीय स्थिति में और अधिक नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने माना कि जब रिकवरी की संभावना शून्य हो, तो कृत्रिम रूप से जीवन को खींचना मरीज के साथ क्रूरता है।


सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख दिशा-निर्देश


अदालत ने इस संवेदनशील प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं:

  • लाइफ सपोर्ट हटाना: हरीश को दिया जा रहा क्लिनिकली एडमिनिस्टर्ड न्यूट्रिशन (CAN) और अन्य जीवन-रक्षक प्रणालियां तुरंत प्रभाव से बंद की जाएं।
  • AIIMS की जिम्मेदारी: मरीज को घर से एम्स के पेलिएटिव केयर सेंटर में शिफ्ट किया जाए और पूरी प्रक्रिया गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हो।
  • जिला स्तर पर व्यवस्था: केंद्र सरकार हर जिले के सीएमओ (CMO) के पास सेकंडरी मेडिकल बोर्ड के लिए डॉक्टरों का पैनल सुनिश्चित करे।
  • व्यापक कानून की आवश्यकता: कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस विषय पर एक ठोस कानून बनाने की सिफारिश की ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में अदालतों के चक्कर न काटने पड़ें।
  • एक मिसाल बनेगा यह फैसला
    हरीश राणा का यह मामला भारत में इच्छामृत्यु की कानूनी व्याख्या को नई दिशा देगा। यह फैसला उन परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण है जिनके अपने सालों से ‘वेजिटेटिव स्टेट’ में हैं और जिनकी वापसी नामुमकिन है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘जीने के अधिकार’ में ‘पीड़ामुक्त मृत्यु’ का अधिकार भी समाहित है।

  • लेख के मुख्य बिंदु (Quick Facts):
  • मरीज: हरीश राणा (32 वर्ष), गाजियाबाद।
  • स्थिति: 13 साल से कोमा (PVS) में, 100% क्वाड्रिप्लेजिक।
  • कानूनी आधार: अनुच्छेद 21 (गरिमा के साथ मरने का अधिकार)।
  • कोर्ट का आदेश: लाइफ सपोर्ट और कृत्रिम पोषण (CAN) हटाना।
  • चिकित्सीय राय: एम्स के मेडिकल बोर्ड ने रिकवरी को असंभव बताया।

यह भी पढ़ें-देवभूमि की बेटी का टॉलीवुड में डंका: प्रियंका खंतवाल का ‘वाइल्ड टाइगर सफारी’ गाना हुआ वायरल, साउथ फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाने को तैयार

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

चित्रकूट के पुराने बाजार इलाके में एक संकरी गली का दृश्य, जहां पुलिस ने एक दो मंजिला इमारत के दरवाजे को पीले रंग के क्राइम सीन टेप से घेरा हुआ है। गली में उत्तर प्रदेश पुलिस की एक जीप, कई मोटरसाइकिलें और स्थानीय लोग इकट्ठे होकर आपस में बात कर रहे हैं। इमारत के प्रवेश द्वार पर काले धुएं के निशान आग लगने का संकेत दे रहे हैं।

चित्रकूट में ममता का कत्ल: माँ ने मासूम बेटे को सीने से लगाकर खुद को लगाई आग; 1.5 वर्षीय बच्चे की मौत, पति गंभीर

कोहरे के कारण बीसलपुर-बेबर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक क्षतिग्रस्त चांदी के रंग की अर्टिगा कार और यूपी रोडवेज की बस (बरेली डिपो) के बीच टक्कर का दृश्य, साथ ही मौके पर मौजूद पुलिस और बचाव दल।

शाहजहांपुर में कोहरे का कहर: बस और अर्टिगा कार की भीषण भिड़ंत, 4 की मौत, 3 गंभीर रूप से घायल

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के बाहर पत्रकार और प्रदर्शनकारी, रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड फैसला।

छत्रपति हत्याकांड: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम बरी; तीन अन्य की उम्रकैद बरकरार

बेंगलुरु की एक रसोई में फर्श पर बैठी एक दुखी और हताश भारतीय महिला का प्रतीकात्मक चित्रण, जो घरेलू कलह और मानसिक पीड़ा को दर्शाता है।

बेंगलुरु: मामूली सा ‘सांभर’ बना मौत का कारण, पति से झगड़े के बाद 27 वर्षीय महिला ने की आत्महत्या

एक भारतीय महिला और एक हलवाई के पास रखे घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर जिन पर नई दरें 913 और 1883 रुपये लिखी हैं।

​बड़ी खबर: आज से महंगा हुआ रसोई गैस, घरेलू सिलेंडर पर ₹60 और कमर्शियल पर ₹115 की भारी बढ़ोत्तरी।

UPSC 2025 topper Anuj Agnihotri celebrating with family and media after securing AIR 1

UPSC CSE 2025 Final Result: कोटा के अनुज अग्निहोत्री ने किया देश में टॉप, टॉप 10 में 3 बेटियों का जलवा; यहाँ देखें पूरी टॉपर लिस्ट

Leave a Comment