के जंगल क्षेत्रों में इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ताजा मामला पश्चिम बंगाल के ग्वालतोड़-रामगढ़ जंगल क्षेत्र से सामने आया है, जहां बीती रात हाथियों ने भारी उत्पात मचाया। इस घटना से इलाके के किसानों में दहशत और नाराजगी दोनों देखी जा रही है।जानकारी के अनुसार, झुंड से अलग हुए दो हाथियों ने देर रात खेतों में घुसकर सिंचाई के लिए लगाए गए दो महंगे सबमर्सिबल पंपों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।इन
पंपों की मदद से किसान अपनी फसलों की सिंचाई कर रहे थे। अचानक हुए इस नुकसान से प्रभावित परिवारों पर आर्थिक संकट गहरा गया है। किसानों का कहना है कि पहले ही मौसम की अनिश्चितता से जूझ रहे थे, ऊपर से इस तरह की घटनाएं उनकी कमर तोड़ रही हैं।वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, सिर्फ दो हाथी ही नहीं बल्कि करीब 24-25 हाथियों का एक बड़ा झुंड भी इलाके में सक्रिय है। यह झुंड पास के बांकुड़ा जिले से निकलकर ग्वालतोड़ क्षेत्र में पहुंचा है।
बताया जा रहा है कि हाथियों का यह समूह जंगलों से होते हुए रेलवे लाइन पार कर विभिन्न गांवों के समीप तक आ गया है। फिलहाल उनकी मौजूदगी भातुरबांदी और आसपास के जंगल इलाकों में दर्ज की गई है।इस दौरान हाथियों ने कई खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को पैरों तले रौंद दिया। धान और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में हाथियों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे खेती करना जोखिम भरा होता जा रहा है।
रात के समय खेतों की रखवाली करना भी अब सुरक्षित नहीं रह गया है।प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते राहत नहीं मिली तो उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। साथ ही उन्होंने हाथियों को आबादी वाले इलाकों से दूर रखने के लिए ठोस कदम उठाने की भी मांग की है।दूसरी ओर, वन विभाग की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और गश्त बढ़ा दी गई है।ग्रामीणों
को सख्त हिदायत दी गई है कि वे शाम और रात के समय जंगल की ओर न जाएं तथा समूह में ही आवागमन करें।विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के घटते क्षेत्र और भोजन की कमी के कारण हाथी आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ना स्वाभाविक है। जरूरत इस बात की है कि दीर्घकालिक योजना बनाकर जंगलों का संरक्षण किया जाए और प्रभावित ग्रामीणों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जाए।फिलहाल, ग्वालतोड़ क्षेत्र में दहशत का माहौल है और लोग सतर्कता बरत रहे हैं। प्रशासन और वन विभाग के सामने चुनौती है कि वे इस स्थिति को नियंत्रित कर ग्रामीणों को राहत दिलाएं।
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