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उत्तराखंड : डिजिटलीकरण की ओर ऐतिहासिक पहल, 1 जनवरी से शुरू होगा भूलेख पोर्टल

On: December 19, 2025 7:24 AM
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उत्तराखंड सरकार ने राज्य में डिजिटलीकरण को नई गति देने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भूमि अभिलेखों को अधिक पारदर्शी, सुलभ और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में भूलेख पोर्टल की शुरुआत 1 जनवरी से की जाएगी। इस पोर्टल के माध्यम से आम नागरिक अपनी भूमि से जुड़ी समस्त जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे, जिससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी।

भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण को लेकर गुरुवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में एनआईसी, आईटीडीए और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भूमि अभिलेखों से संबंधित विभिन्न सॉफ्टवेयर और पोर्टलों की प्रगति की समीक्षा की।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि भूमि अभिलेखों से जुड़े सभी पोर्टल शीघ्र शुरू किए जाएं और भूलेख पोर्टल को 1 जनवरी से अनिवार्य रूप से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि इस पहल से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी और भूमि संबंधी कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी।

भूलेख पोर्टल के माध्यम से नागरिक अपनी भूमि का खसरा, खतौनी, नक्शा और स्वामित्व विवरण आसानी से ऑनलाइन देख सकेंगे। इससे न केवल समय और धन की बचत होगी, बल्कि भूमि रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना भी कम होगी।

मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिए कि दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में जैसे ही स्टेटस अपडेट हो, संबंधित व्यक्ति को तुरंत व्हाट्सएप और एसएमएस के माध्यम से सूचना दी जाए। इसके साथ ही आरओआर (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) में किसी भी प्रकार के संशोधन के साथ ही सर्वर पर रिकॉर्ड स्वतः अपडेट होना सुनिश्चित किया जाए। नागरिकों को भूमि अभिलेखों की प्रति ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध कराई जाए, यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

इसके अलावा मुख्य सचिव ने आरसीएमएस (रेवेन्यू कोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल को 26 जनवरी 2026 तक शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी राजस्व न्यायालयों को पूरी तरह ई-कोर्ट प्रणाली से जोड़ा जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बन सकें।

आरसीएमएस पोर्टल के माध्यम से राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों का ऑनलाइन पंजीकरण, सुनवाई की तिथि, आदेश और मामले की वर्तमान स्थिति डिजिटल रूप से उपलब्ध होगी। इससे भूमि विवादों के निस्तारण में तेजी आएगी और नागरिकों को बार-बार न्यायालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद पटवारी और कानूनगो स्तर पर मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखना संभव नहीं होगा। सत्यापन की समय-सीमा तय कर उसे सॉफ्टवेयर में शामिल किया जाएगा, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी और भूमि विवादों का शीघ्र समाधान हो सकेगा।

मुख्य सचिव ने आईटीडीए को निर्देश देते हुए कहा कि सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाया जाए। इसके लिए आवश्यक हार्डवेयर, तकनीकी संसाधन और आधारभूत सुविधाएं समय रहते उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही, हितधारकों और उपयोगकर्ताओं के लिए आवश्यक प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में सचिव डॉ. एस.एन. पांडेय, राजस्व आयुक्त रंजना राजगुरु, जिलाधिकारी सविन बंसल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उत्तराखंड सरकार की यह पहल राज्य को डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक नई पहचान देने वाली साबित होगी।

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