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उत्तराखंड में SIR की तैयारियाँ तेज़, 2003 के बाद अन्य राज्यों से आए मतदाताओं का अलग रिकॉर्ड तैयार

On: December 2, 2025 3:46 AM
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उत्तराखंड में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की तैयारियाँ तेज़ गति पकड़ चुकी हैं। राज्यभर में मतदाता सूची को शुद्ध करने और फर्जी वोटिंग पर रोक लगाने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर डेटा मिलान किया जा रहा है। इसी के तहत वर्ष 2003 की मतदाता सूची को वर्तमान 2025 की सूची से मिलाकर मतदाताओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
2003 के बाद अन्य राज्यों से आए वोटरों का विशेष रिकॉर्ड तैयार
राज्य में वर्ष 2003 के बाद अन्य राज्यों से आकर बसे और यहां मतदाता के रूप में पंजीकृत लोगों का एक अलग डेटाबेस बनाया जा रहा है। SIR शुरू होने पर यही डेटा सरकार को अन्य राज्यों की मतदाता सूचियों से मिलान करने में मदद करेगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि जिन लोगों ने उत्तराखंड में वोटर कार्ड बनवाया है, कहीं उनका नाम उनके मूल राज्य की मतदाता सूची में तो अभी भी दर्ज नहीं है।
बीएलओ ऐप के माध्यम से सूचियों का डिजिटल सत्यापन
मतदाता सूची के सत्यापन के लिए चुनाव विभाग ने बीएलओ ऐप का उपयोग शुरू कर दिया है। इस ऐप के जरिए प्रत्येक मतदाता की जानकारी को 2003 की सूची से क्रॉस-चेक किया जा रहा है।
• प्रदेश के भीतर स्थान बदलने वाले मतदाताओं की भी जाँच
• 2003 के बाद बने नए मतदाताओं के अभिभावकों का पुराने रिकॉर्ड से मिलान
• मूल निवास की पुष्टि के लिए पूर्व मतदाता क्षेत्रों की जानकारी एकत्र
एक प्रामाणिक और व्यापक डेटाबेस तैयार कर लेने के बाद, SIR की प्रक्रिया शुरू होते ही जिन मतदाताओं का रिकॉर्ड स्पष्ट मिलेगा, उन्हें दोबारा भारी दस्तावेज़ देने की ज़रूरत नहीं होगी। इससे प्रक्रिया तेज़ और सरल बन जाएगी।
बाहर से आने वाले मतदाताओं पर विशेष निगरानी
अन्य राज्यों से आकर मतदाता बने लोगों के लिए अलग से डेटा तैयार किया जा रहा है, जिसमें यह जानकारी जुटाई जा रही है कि वे किस राज्य से आए हैं और उनका मूल मतदाता क्षेत्र कौन-सा था।
SIR के दौरान उनके नाम या उनके अभिभावकों के नाम संबंधित राज्यों की मतदाता सूची में खोजे जाएंगे। यदि किसी व्यक्ति का नाम किसी भी राज्य में दर्ज नहीं मिलता, तो उनकी पहचान की और गहन जांच की जाएगी।
फर्जी मतदाताओं की पहचान में मदद
इन तैयारियों का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि SIR के दौरान
• फर्जी मतदाताओं की पहचान करना आसान होगा
• दोहरी मतदाता प्रविष्टियों को समाप्त किया जा सकेगा
• गलत तरीके से मतदाता बने विदेशी नागरिकों को भी चिन्हित किया जा सकेगा
सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तूदास का कहना है कि अभी 2003 की मतदाता सूची से मिलान का कार्य चल रहा है, जिससे SIR शुरू होने पर मतदाता सूची को अंतिम रूप देने में काफी सुविधा होगी।

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