जामा मस्जिद कमेटी के फैसले पर वक्फ बोर्ड और संगठनों ने उठाए सवाल
देहरादून में मुफ्ती हशीम अहमद सिद्दीकी को नया शहर काज़ी घोषित कर दिया गया है, लेकिन उनकी नियुक्ति शुरुआत से ही विवादों में घिर गई है। जामा मस्जिद पलटन बाज़ार की प्रबंधन समिति ने जुमा की नमाज़ के बाद औपचारिक रूप से उन्हें शहर काज़ी के रूप में पेश करते हुए पगड़ी बांधी। मुफ्ती हशीम पिछले दो वर्षों से जामा मस्जिद के इमाम के रूप में अपने दायित्व निभा रहे थे और दारुल उलूम देवबंद के शिक्षित हैं।
बीते शनिवार शहर काज़ी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी के निधन के बाद से नए शहर काज़ी की नियुक्ति को लेकर तैयारियां चल रही थीं। मस्जिद समिति के अध्यक्ष नसीम अहमद का कहना है कि परंपरा के अनुसार जामा मस्जिद और ईदगाह के इमाम ही शहर काज़ी नियुक्त किए जाते रहे हैं, इसलिए मुफ्ती हशीम को यह पद सौंपा गया है।
वक्फ बोर्ड ने उठाया सवाल: “जिस कमेटी ने नियुक्ति की, वह तो भंग हो चुकी है”
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने इस नियुक्ति पर गंभीर आपत्ति जताई है। बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि शहर काज़ी की नियुक्ति से पहले बोर्ड से सलाह अनिवार्य है, जबकि इस पूरे मामले में उनसे कोई राय नहीं ली गई।
शम्स के अनुसार, “जिस कमेटी ने यह घोषणा की है, वह 2021 में ही भंग कर दी गई थी। नई कमेटी के गठन की प्रक्रिया जारी थी, ऐसे में पुरानी कमेटी द्वारा किसी भी आधिकारिक निर्णय का कोई औचित्य नहीं है।”
उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में कई आपत्तियाँ और शिकायतें भी बोर्ड तक पहुंची हैं। वक्फ बोर्ड इस मुद्दे को जल्द ही अपनी बैठक में रखकर मामले को अपने हाथों में लेगा।
मुस्लिम सेवा संगठन का विरोध – “यह नियुक्ति असंवैधानिक और बिना मशविरा की गई है”
मुस्लिम सेवा संगठन ने भी नई नियुक्ति को लेकर नाराज़गी जताई है। संगठन का कहना है कि कमेटी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, और अध्यक्ष व सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद भी वर्तमान में रिक्त हैं। इसलिए कमेटी द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय वैध नहीं माना जा सकता।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि शहर के अधिकांश उलेमा से कोई सलाह नहीं ली गई और न ही समुदाय की राय का सम्मान किया गया। इस वजह से संगठन ने नियुक्ति को अवैध बताते हुए इसका विरोध करने का ऐलान किया है।
देहरादून में नए शहर काज़ी की नियुक्ति पर विवाद गहराया
On: November 29, 2025 10:00 AM






