उत्तराखंड सरकार ने वन्यजीव–मानव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य में भालू, तेंदुए या अन्य वन्यजीवों के हमलों में घायल होने वाले किसी भी व्यक्ति के इलाज पर आने वाला पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। यह फैसला सीधे तौर पर उन लोगों को बड़ी राहत देगा जो दूरस्थ व पहाड़ी क्षेत्रों में वन्यजीवों के बढ़ते दखल की वजह से लगातार खतरे का सामना कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित कैंप कार्यालय में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की, जिसमें उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि घायलों के उपचार में किसी भी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने कहा कि घायल व्यक्तियों को तुरंत गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, चाहे उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना हो या बड़े अस्पतालों में रेफ़र करना पड़े, पूरी प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता होनी चाहिए।
सीएम धामी ने मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन तथा प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु को प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करने, वन विभाग की टीमों को और अधिक सक्रिय करने तथा ग्रामीणों के लिए जागरूकता अभियान तेज करने के लिए निर्देशित किया है। सरकार चाहती है कि संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते चेतावनी और आवश्यक सुरक्षा जानकारी मिल सके, जिससे हादसों को रोका जा सके।
इसके अलावा सरकार ने हाल ही में वन्यजीव हमलों में जान गंवाने वाले पीड़ितों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि को 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया है। यह कदम उन परिवारों के लिए आर्थिक सहायता का बड़ा आधार साबित होगा जो अचानक हुए हमलों में अपने किसी परिजन को खो देते हैं।
इस निर्णय के साथ राज्य सरकार ने संदेश दिया है कि नागरिकों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य से जुड़ा हर मुद्दा उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, और वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वह पूरी तरह तत्पर है।
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