उत्तराखंड में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाने के लिए पुलिस विभाग एक बड़ी पहल शुरू करने जा रहा है। प्रदेश सरकार की नई योजना के तहत हर थाना स्तर पर साइबर फोरेंसिक कमांडो तैनात किए जाएंगे, जो आधुनिक तकनीकों की मदद से डिजिटल अपराधों की गहन जांच करेंगे।
सचिव गृह शैलेश बगौली के अनुसार, इस ambitious योजना का पहला चरण जल्द लागू किया जाएगा। शुरुआती चरण में 350 से अधिक पुलिस कर्मियों का चयन किया जाएगा, जिनका तकनीकी व आईटी बैकग्राउंड मजबूत होगा।
क्या होगा साइबर फोरेंसिक कमांडो का मुख्य दायित्व?
इन प्रशिक्षित कमांडो का उद्देश्य थाना क्षेत्र में होने वाले हर प्रकार के साइबर अपराध की वैज्ञानिक व तकनीकी जांच करना होगा। उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं:
• अपराध में उपयोग हुए डिजिटल उपकरणों—जैसे मोबाइल, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, DVR, CCTV आदि—की फोरेंसिक जांच
• घटनास्थल पर पहुंचकर डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित व संरक्षित करना
• डाटा रिकवरी कर महत्वपूर्ण तकनीकी प्रमाण जुटाना
• एकत्रित साक्ष्यों को आगे की विस्तृत जांच के लिए केंद्रीय टीम को भेजना
केंद्रीय फोरेंसिक टीम इन डाटा का गहन विश्लेषण करेगी, ताकि अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में तेजी आए।
क्यों पड़ी इस व्यवस्था की जरूरत?
राज्य में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। रोजाना ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें अपराधी नई तकनीक और छल-कपट के माध्यम से लोगों की जमा-पूंजी एक ही क्लिक में गायब कर देते हैं।
हालांकि राज्य में पहले से साइबर क्राइम यूनिट कार्यरत है, लेकिन भारत न्याय संहिता लागू होने के बाद हर अपराध की जांच थाना स्तर पर अनिवार्य हो गई है। इसी आवश्यकता को देखते हुए हर थाना अपने साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञों से सुसज्जित किया जा रहा है।
166 थानों में दो-दो साइबर कमांडो
प्रदेश के कुल 166 थानों में प्रत्येक स्थान पर दो साइबर फोरेंसिक कमांडो की तैनाती की योजना बनाई जा रही है। इससे न केवल जांच तेज होगी बल्कि अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।
उन्नत प्रशिक्षण से लैस होंगे कमांडो
इन कमांडो को अत्याधुनिक तकनीकों और साइबर सुरक्षा प्रणालियों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के प्रमुख क्षेत्र होंगे:
• डिजिटल फोरेंसिक तकनीक
• नेटवर्क ट्रैकिंग व विश्लेषण
• ऑनलाइन फ्रॉड की पहचान
• हैकिंग पैटर्न को समझना
• थ्रेट इंटेलिजेंस
• क्रिप्टोग्राफी
यह प्रशिक्षण उन्हें साइबर अपराधों से जुड़ी जटिल चुनौतियों का सामना करने में दक्ष बनाएगा।
तेज और सटीक जांच की उम्मीद
साइबर फोरेंसिक कमांडो की तैनाती से साइबर अपराधों के मामलों में तेजी आएगी और पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी। सचिव गृह ने बताया कि पुलिस मुख्यालय के साथ बैठकें पूरी की जा चुकी हैं और जल्द ही इस पूरी योजना को धरातल पर उतारने की विस्तृत कार्ययोजना जारी की जाएगी।
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