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Uttarakhand :स्कूल बस में मौत का सफर टला, नशे में धुत ड्राइवर को एआरटीओ ने किया गिरफ्तार, बच्चों की जान बची

On: November 11, 2025 5:43 AM
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पंजाब से स्कूली बच्चों को लेकर आ रही एक बस में सोमवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बस चालक शराब के नशे में धुत होकर वाहन चला रहा था, लेकिन परिवहन विभाग की तत्परता और एआरटीओ की सूझबूझ से सभी बच्चों की जान सुरक्षित बच गई।
हल्द्वानी के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) जितेंद्र सिंगवान अपनी टीम के साथ कालाढूंगी-नैनीताल मार्ग पर नियमित वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। उसी दौरान बैलपड़ाव की ओर से आ रही एक हरियाणा नंबर की बस (एचआर 37डी-9675) को रोकने का इशारा किया गया। लेकिन ड्राइवर ने रुकने के बजाय और तेज रफ्तार से बस आगे बढ़ा दी। टीम को शक हुआ कि बस में कुछ गड़बड़ी है, और जब यह पता चला कि बस में स्कूली बच्चे सवार हैं, तो मामला गंभीर हो गया।
एआरटीओ सिंगवान ने तत्परता दिखाते हुए बस का पीछा किया और तुरंत कालाढूंगी पुलिस को सूचना दी। कुछ दूरी तक पीछा करने के बाद बस को नयागांव के पास रोका गया। जब बस की जांच की गई, तो पता चला कि उसमें पंजाब के मानसा जिले के 45 बच्चे और उनके शिक्षक यात्रा कर रहे थे। जांच के दौरान चालक कुलदीप (निवासी पटियाला) को शराब के नशे में धुत पाया गया।
एल्कोमीटर जांच में उसके रक्त में 550 एमएल/100 एमजी एल्कोहल पाई गई, जबकि नियमों के अनुसार 30 एमएल की सीमा पार होने पर भी कार्रवाई होती है। यह स्पष्ट था कि चालक ने अत्यधिक मात्रा में शराब पी रखी थी। यदि एआरटीओ टीम समय रहते कार्रवाई नहीं करती, तो एक भीषण हादसा हो सकता था।
बस की फिटनेस और दस्तावेजों की जांच में भी बड़ी लापरवाही सामने आई — बस बिना फिटनेस के चल रही थी, टैक्स तक जमा नहीं किया गया था। एआरटीओ सिंगवान ने बस को कालाढूंगी कोतवाली में सीज कराया और चालक का चालान किया।
बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित उनके बैलपड़ाव स्थित होटल तक पहुँचाया गया। इस पूरी कार्रवाई में सहायक उपनिरीक्षक अरविंद ह्यांकी, चालक महेंद्र और पूरी चेकिंग टीम मौजूद रही। एआरटीओ टीम ने बच्चों को लगातार दिलासा दिया, जो पूरी तरह सहमे हुए थे।
चालक को नशे की हालत में नियंत्रित करने और थाने तक पहुंचाने में करीब साढ़े तीन घंटे का समय लगा। एआरटीओ जितेंद्र सिंगवान ने बताया कि चालक के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 के तहत कार्रवाई की गई है। इसके तहत छह महीने तक की कैद और 10 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
चालक का ड्राइविंग लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक गंभीर मामला है और ऐसी लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग ने चेतावनी दी है कि स्कूल बसों की नियमित जांच जारी रहेगी ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सौभाग्य से एआरटीओ की तत्परता ने 45 मासूमों की जिंदगी बचा ली — वरना यह सफर मौत का सफर साबित हो सकता था।

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