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कार्तिक पूर्णिमा 2025: हरिद्वार में गंगा तट पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, दीपों से जगमगाई देव दीपावलीभोर से ही लाखों श्रद्धालु पहुंचे हर की पैड़ी

On: November 5, 2025 4:21 AM
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कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर हरिद्वार की पवित्र हर की पैड़ी में श्रद्धा और भक्ति का अभूतपूर्व सागर उमड़ पड़ा। भोर होते ही उत्तर भारत सहित देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालु गंगा तट पर पहुंचने लगे। ठंडी हवाओं और शीतल वातावरण के बावजूद भक्तों का जोश देखते ही बन रहा था। हर कोई पवित्र गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जन की भावना से सराबोर था।
गंगा स्नान का विशेष महत्व और धार्मिक आस्था
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और विष्णुलोक की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी पावन विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर आराधना की तथा दीपदान कर देव दीपावली का पर्व मनाया।
दीपों से सजी गंगा आरती ने मोहा मन
संध्या समय हर की पैड़ी पर जब गंगा आरती आरंभ हुई तो पूरा वातावरण मंत्रोच्चारों और घंटनाद से गूंज उठा। जलते दीपों की स्वर्णिम आभा गंगा जल पर झिलमिला रही थी, मानो धरती पर देवताओं का आगमन हो गया हो। श्रद्धालुओं ने दीप प्रवाहित कर अपने आराध्य को नमन किया और गंगा माता से समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।
दान, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों की धूम
स्नान के बाद अनेक परिवारों ने गंगा किनारे हवन, पूजन और विशेष अनुष्ठान संपन्न किए। कई श्रद्धालुओं ने खिचड़ी, वस्त्र, और आवश्यक वस्तुओं का दान कर पुण्य संचय किया। गंगा तट पर हर ओर भक्ति का वातावरण था — कहीं भजन-कीर्तन गूंज रहे थे, तो कहीं दीपों की कतारें आस्था की कहानी बयां कर रही थीं।
ट्रैफिक और सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम
भक्तों की अपार भीड़ के कारण हरिद्वार-दिल्ली-रुड़की हाईवे पर सुबह से ही वाहनों का भारी दबाव देखने को मिला। कई स्थानों पर यातायात धीमा पड़ा, किंतु पुलिस एवं प्रशासन की टीमों ने मुस्तैदी दिखाते हुए ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित रखा। सुरक्षा के मद्देनज़र घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
हरिद्वार में आध्यात्मिक रंग में रंगी रात
रात ढलते-ढलते हर की पैड़ी, मालवीय द्वीप और आसपास के घाटों पर दीपों की अनगिनत पंक्तियाँ जगमगा उठीं। हर तरफ से आती मंत्रोच्चारण की ध्वनि, जलती दीपशिखाओं की आभा और भक्तों के चेहरे पर झलकती भक्ति — इन सबने हरिद्वार को एक अद्भुत आध्यात्मिक आभा से आलोकित कर दिया।
आस्था, भक्ति और संस्कृति का संगम
कार्तिक पूर्णिमा का यह पावन पर्व केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा के जीवंत दर्शन का अवसर भी बना। गंगा तट पर दीपों से सजी यह रात “देव दीपावली” के रूप में सदियों से आस्था की अनूठी मिसाल पेश करती आ रही है।

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