देहरादून में फौजी और रिटायर्ड अधिकारी बने ठगी के शिकार, प्रॉपर्टी डीलर और टेंडर एजेंट पर कार्रवाई की तैयारी
देहरादून में जमीन बेचने और सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी का मामला सामने आया है। दोनों मामलों में आरोपितों ने भरोसा जीतकर लाखों रुपये हड़प लिए। खास बात यह है कि एक मामले में पुलिस ने घटना के दस साल बाद मुकदमा दर्ज किया है। जबकि दूसरे प्रकरण में कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज हुई है।
फर्जी एग्रीमेंट कर फौजी से हड़पे 23 लाख रुपये
मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के नींबूचौढ़ गांव निवासी विरेंद्र सिंह, जो वर्तमान में सेना में सिपाही पद पर तैनात हैं, ने कोर्ट में दी शिकायत में बताया कि वर्ष 2022 में उनकी मुलाकात एक पुराने परिचित से हुई थी। बातचीत के दौरान उन्होंने देहरादून में जमीन खरीदने की इच्छा जताई। उसी परिचित ने उन्हें शिवम विहार, कारगी, थाना पटेलनगर निवासी मुकेश कमाड़ी नामक प्रॉपर्टी डीलर से मिलवाया, जो खुद को “विरासत प्रॉपर्टी” का स्वामी बताता था।
मुकेश कमाड़ी ने विरेंद्र सिंह को शहर में कई स्थानों पर भूमि दिखाई। अंततः 21 मई 2022 को विरेंद्र सिंह को बंजारावाला क्षेत्र में 92 वर्ग मीटर का एक प्लॉट पसंद आया। सौदे की कीमत 28.50 लाख रुपये तय हुई। इसके बाद छह जून 2022 को उन्होंने 23 लाख रुपये अग्रिम के तौर पर देकर एक एग्रीमेंट कर लिया, जिसमें तय हुआ कि शेष 5.5 लाख रुपये बैनामा के समय दिए जाएंगे।
हालांकि, जब विरेंद्र सिंह ने सितंबर 2022 में बैनामा कराने की बात कही तो मुकेश टालमटोल करने लगा। कई बार दबाव बनाने पर उसने न केवल अनुचित व्यवहार किया बल्कि धमकी भी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट के आदेश पर पटेलनगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। थाना प्रभारी निरीक्षक चंद्रभान सिंह अधिकारी ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी जल्द की जाएगी।
10 साल पुराना टेंडर घोटाला, रिटायर्ड अधिकारी से ठगे 17 लाख रुपये
दूसरा मामला कैंट थाना क्षेत्र का है। मंदिर लेन वनस्थली, बल्लूपुर निवासी 83 वर्षीय राजेंद्र प्रसाद भट्ट, जो ओएनजीसी से वरिष्ठ अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हैं, ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वर्ष 2014-15 में दिल्ली निवासी राहुल, पुत्र स्व. श्री… (नाम उपलब्ध नहीं), ने उन्हें सरकारी टेंडर दिलाने का झांसा दिया था।
आरोपी ने फोन पर भट्ट से संपर्क किया और कहा कि उसके पास शिक्षा से संबंधित एक सरकारी टेंडर है, जिसमें निवेश करने पर दोगुना मुनाफा मिलेगा। लालच में आकर भट्ट ने आरोपी के बताए बैंक खाते में अलग-अलग तिथियों में 16.96 लाख रुपये भेज दिए।
कुछ समय बाद जब टेंडर की कोई प्रगति नहीं हुई तो उन्होंने कई बार संपर्क किया, लेकिन आरोपी ने टालमटोल शुरू कर दी। शिकायत थाने में दी गई, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार 10 साल बाद राजेंद्र प्रसाद भट्ट ने ई-एफआईआर के माध्यम से पुनः शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
कैंट कोतवाली प्रभारी निरीक्षक के.के. लुंठी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी ने फोन कॉल के माध्यम से ही पूरा सौदा किया था। अब पुलिस बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की जांच में जुटी है।
पुलिस ने शुरू की जांच, आरोपितों की तलाश जारी
दोनों मामलों में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पटेलनगर थाना क्षेत्र में भूमि सौदे से जुड़ी ठगी कोर्ट के आदेश पर दर्ज की गई, जबकि टेंडर धोखाधड़ी में ई-एफआईआर के जरिए मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने पर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
सारांश:
देहरादून में निवेश और संपत्ति के नाम पर ठगी के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर लोगों को सतर्क रहने का संदेश दिया है। पुलिस का कहना है कि किसी भी प्रकार के सौदे से पहले दस्तावेज़ों और व्यक्तियों की पूरी जांच अवश्य करें, ताकि भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।
Dehradun :जमीन और सरकारी टेंडर के नाम पर 40 लाख की ठगी ,एक दशक बाद दर्ज हुई FIR
On: October 30, 2025 9:28 AM





