उत्तरकाशी में आई प्राकृतिक आपदा के बाद भी श्रद्धा की आस्था नहीं डगमगाई। प्रशासन और स्थानीय एजेंसियों के अथक प्रयासों से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा 10 सितंबर से दोबारा शुरू हो सकी। यात्रा के पुनः आरंभ होने के बाद से अब तक 1.41 लाख तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं, जिससे दोनों धामों में आने वाले कुल श्रद्धालुओं की संख्या 14 लाख के पार पहुंच गई है।
हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम है, लेकिन आपदा के बाद यात्रा के दोबारा सुचारु होने से स्थानीय कारोबारियों और तीर्थाटन से जुड़े लोगों को बड़ी राहत मिली है। शुरू में ऐसा लग रहा था कि भारी नुकसान के बाद यात्रा इस वर्ष रफ्तार नहीं पकड़ पाएगी, मगर श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह आशंका गलत साबित कर दी।
चारधाम में उत्तरकाशी का महत्व
उत्तराखंड के चार धामों में से दो – गंगोत्री और यमुनोत्री – उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं। यही कारण है कि यह जनपद चारधाम यात्रा का अहम केंद्र माना जाता है। यात्रा हर वर्ष दो चरणों में संपन्न होती है – पहला चरण मानसून से पहले अप्रैल से जून तक चलता है, जबकि दूसरा चरण सितंबर से कपाट बंद होने तक यानी अक्टूबर या नवंबर तक चलता है।
आपदा से थमी यात्रा, फिर बहाल हुई आस्था
इस वर्ष 5 अगस्त को धराली क्षेत्र में खीर गंगा नदी के उफान से आई भीषण आपदा ने गंगोत्री धाम की यात्रा पूरी तरह ठप कर दी थी। गंगोत्री हाईवे कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया था। उधर, यमुनोत्री धाम की यात्रा पहले से ही मुश्किलों में थी—28 जून को सिलाई बैंड के पास बादल फटने, कृष्णा चट्टी और फूलचट्टी के बीच भू-धंसाव और स्यानाचट्टी क्षेत्र में यमुना नदी पर अस्थायी झील बनने से आवागमन रुक गया था।
इन परिस्थितियों में ऐसा लगने लगा था कि इस बार चारधाम यात्रा पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी। मगर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के नेतृत्व में लोनिवि (राष्ट्रीय राजमार्ग खंड) और सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमों ने लगातार काम करते हुए सड़कों को दुरुस्त किया और अंततः 10 सितंबर से गंगोत्री धाम यात्रा बहाल हो गई। कुछ ही दिनों बाद यमुनोत्री धाम की यात्रा भी फिर शुरू हो गई।
दूसरे चरण में गंगोत्री धाम में 89,035 तीर्थयात्री और यमुनोत्री धाम में 58,133 तीर्थयात्री दर्शन को पहुंचे।
पिछले वर्ष से कम रही संख्या, फिर भी उम्मीद बरकरार
यात्रा के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 में गंगोत्री धाम में 8,15,273 और यमुनोत्री धाम में 7,14,755 श्रद्धालु पहुंचे थे। जबकि इस वर्ष गंगोत्री में 7,58,249 और यमुनोत्री में 6,44,637 तीर्थयात्री पहुंचे।
यात्रा से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि यदि गंगा और यमुना घाटियों में इस बार आपदाओं का असर न पड़ा होता, तो तीर्थयात्रियों की संख्या नया रिकॉर्ड बना सकती थी। फिर भी, कठिन परिस्थितियों के बावजूद लाखों श्रद्धालुओं का पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि आस्था हर विपरीत परिस्थिति पर भारी पड़ती है।
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