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सुपरस्टार रजनीकांत की उत्तराखंड यात्रा: ऋषिकेश के बाद बदरीनाथ धाम के दर्शन

On: October 6, 2025 9:01 AM
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साउथ के मशहूर अभिनेता रजनीकांत एक बार फिर उत्तराखंड की आध्यात्मिक धरती पर आए। सबसे पहले वे ऋषिकेश स्थित स्वामी दयानंद आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने अपने गुरु सुधानंद सरस्वती का हाल जाना और आश्रम में रह रहे लोगों को भोजन कराया। इसके बाद वे बदरीनाथ धाम की ओर रवाना हुए।

ऋषिकेश के दयानंद आश्रम में रजनीकांत

ऋषिकेश के चंद्रेश्वर नगर स्थित स्वामी दयानंद आश्रम से रजनीकांत का गहरा नाता है। वे हर साल यहां आते हैं, अपने गुरु को प्रणाम करते हैं और गंगा आरती में हिस्सा लेते हैं। इस बार भी 5 सितंबर को रजनीकांत आश्रम पहुंचे और सुधानंद सरस्वती की तबियत की जानकारी ली।

बताया जा रहा है कि सुधानंद सरस्वती की स्वास्थ्य स्थिति कुछ ठीक नहीं है, इसलिए अभिनेता उनके हाल जानने ऋषिकेश आए। उन्होंने आश्रम के लोगों के लिए भोजन का भी इंतजाम किया। उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें वे पत्तल में खाना खाते नजर आए।

बदरीनाथ धाम की यात्रा

ऋषिकेश में कुछ समय बिताने के बाद रजनीकांत रविवार को बदरीनाथ धाम के दर्शन के लिए रवाना हुए। बड़े पर्दे के सुपरस्टार रजनीकांत कई बार उत्तराखंड आ चुके हैं, खासकर ऋषिकेश और बदरीनाथ धाम की यात्रा के लिए।

सुपरस्टार रजनीकांत के बारे में

रजनीकांत का असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ है। उनका जन्म 12 दिसंबर 1950 को बेंगलुरु (तब मैसूर) में हुआ। दक्षिण भारतीय और भारतीय सिनेमा के वे सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक हैं। शुरुआत में उन्होंने बस कंडक्टर के रूप में काम किया और बाद में अभिनय की दुनिया में आए।

रजनीकांत ने मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट से अभिनय की बारीकियां सीखी। साल 1975 में उन्होंने तमिल फिल्म ‘अपूर्व रागंगल’ से डेब्यू किया। शुरुआत में खलनायक की भूमिका में रहे रजनीकांत ने अपनी अनोखी शैली और अभिनय से दर्शकों का दिल जीतकर हीरो का स्थान पाया।

उनकी हाल की हिट फिल्मों में ‘जेलर’, ‘वेट्टैयन’ शामिल हैं, जबकि इन दिनों ‘कुली’ चर्चा में है। पुरस्कारों की बात करें तो उन्हें 2002 में पद्म भूषण और 2016 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है। वे ‘थलाइवा’ के नाम से भी प्रसिद्ध हैं।

ऋषिकेश के दयानंद आश्रम के बारे में

स्वामी दयानंद आश्रम की स्थापना 1960 के दशक में स्वामी दयानंद सरस्वती ने की थी। वे ख्यातिप्राप्त वेदांत शिक्षक और संस्कृत के विद्वान थे। आश्रम गंगा नदी के किनारे स्थित है और वेदांत एवं संस्कृत अध्ययन का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

आश्र्म को आर्ष विद्या पीठम (Arsha Kulam) के नाम से भी जाना जाता है। यहां प्राचीन ऋषियों की शिक्षा पर आधारित पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं। वेदांत, पाणिनीय शैली में संस्कृत व्याकरण और वैदिक मंत्रोच्चार की पढ़ाई यहां नियमित रूप से होती है।

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