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“उत्तराखंड में आपदा के नुकसान का आंकलन करेंगे अधिकारी, CM धामी ने जारी किए निर्देश”

On: September 21, 2025 6:29 AM
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उत्तराखंड में इस वर्ष मानसून के दौरान व्यापक और गंभीर नुकसान हुआ, जिससे राज्य की कई परिसंपत्तियाँ और आम लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। इसे देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने नुकसान की भरपाई के लिए अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा पोस्ट डिजास्टर नीड्स एसेसमेंट (पीडीएनए) प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।

पीडीएनए के आधार पर केंद्र सरकार को विस्तृत प्रस्ताव भेजा जाएगा और राज्य की मांग पर विशेष पैकेज की स्वीकृति ली जाएगी। इस पैकेज में केवल सरकारी परिसंपत्तियों की भरपाई ही नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों की आजीविका बहाली के लिए भी विशेष प्रावधान शामिल किए जाएंगे।

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जिलों में वास्तविक नुकसान का आकलन

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

शनिवार को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में सचिव विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए कि एसडीआरएफ मद में आच्छादित और अनाच्छादित नुकसान का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराएँ।

सचिव सुमन ने कहा कि केवल एसडीआरएफ मद से हुए नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। इसलिए भारत सरकार से विशेष पैकेज की आवश्यकता है। इसके लिए केंद्र सरकार की टीम उत्तराखंड भेजी जा रही है, जो चार भागों में विभाजित होकर सभी जिलों में वास्तविक नुकसान का आकलन करेगी। इसके बाद प्रत्येक योजना और प्रभावित क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।

प्रभावितों की आजीविका पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ निर्देश दिए हैं कि पर्यटन, तीर्थाटन, होटल-रेस्टोरेंट, टैक्सी-ढाबा व्यवसायियों, किसानों, टूरिस्ट गाइड और अन्य प्रभावितों की आजीविका बहाल करने के लिए हरसंभव मदद दी जाएगी।

सभी जिलों को यह निर्देश भी दिया गया है कि वे पीडीएनए प्रक्रिया में आजीविका को प्राथमिकता दें और प्रभावित लोगों का विस्तृत डेटा रिपोर्ट में शामिल करें। यह कदम न केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई करेगा, बल्कि प्रभावितों को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करेगा।

विभागाध्यक्षों को फील्ड विजिट के निर्देश

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी विभागाध्यक्षों को अगले सप्ताह से फील्ड विजिट करने का निर्देश दिया है। पहले हफ्ते में विभागाध्यक्ष स्वयं जिलों में रहकर कार्यों की समीक्षा करेंगे। इसके बाद दूसरे और तीसरे हफ्ते में वरिष्ठ अधिकारी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।

जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग से समस्याओं का तुरंत समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

पीडीएनए में नुकसान और आजीविका दोनों का समावेश

पीडीएनए प्रक्रिया में केवल संरचनात्मक या भौतिक नुकसान का ही आकलन नहीं होगा। होटल, टैक्सी, ढाबा संचालक, टूरिस्ट गाइड, किसान और फल-फूल विक्रेताओं के नुकसान का भी ब्यौरा रिपोर्ट में दर्ज किया जाएगा।

इस प्रक्रिया से राज्य सरकार को केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज दिलाने में मदद मिलेगी और प्रभावितों की आजीविका जल्दी बहाल होगी।

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