अस्पताल प्रशासन की लापरवाही
देहरादून के दून अस्पताल में आपदा प्रभावित एक वृद्धा को इलाज के लिए घंटों भटकना पड़ा। आईसीयू बेड खाली न होने का हवाला देते हुए अस्पताल प्रशासन ने उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया। करीब साढ़े चार घंटे तक वृद्धा दर्द से तड़पती रही और परिजन गुहार लगाते रहे।
मुख्यमंत्री तत्पर, लेकिन अस्पताल ने बढ़ाई पीड़ा
जहां एक ओर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रशासनिक अमला आपदा प्रभावितों की हरसंभव मदद में जुटा है, वहीं दून अस्पताल की यह लापरवाही पहले से बीमार पीड़ित बुजुर्ग के जख्मों को और गहरा करने जैसा साबित हुई।
गांव से शहर तक का संघर्ष
सिल्ला (फुलेत) गांव की रहने वाली 62 वर्षीय क्योला देवी को अचानक चक्कर आने और शरीर का दाहिना हिस्सा सुन्न पड़ने के बाद परिजन बेहद कठिन परिस्थितियों में उन्हें गांव से बाहर लेकर आए। दुर्गम रास्तों और आपदा से क्षतिग्रस्त मार्गों के बीच एसडीआरएफ जवानों की मदद से कंधे पर लादकर पहले मसूरी उपजिला चिकित्सालय पहुंचाया गया। प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें दून अस्पताल रेफर कर दिया।
दून अस्पताल में मना कर दिया भर्ती करने से
शाम करीब चार बजे एंबुलेंस से दून अस्पताल पहुंचने के बाद भी प्रशासन ने आईसीयू बेड न होने की बात कहते हुए भर्ती से इंकार कर दिया। परिजन कई घंटों तक इधर-उधर भटकते रहे और लगातार गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
डीएम के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुआ इलाज
स्थिति गंभीर देख गांव के प्रधान ने डीएम सविन बंसल को मामले की जानकारी दी। इसके बाद डीएम के सख्त निर्देश पर रात करीब साढ़े आठ बजे अस्पताल ने क्योला देवी को आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया।
अस्पताल प्रबंधन की सफाई
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट ने बताया कि शाम करीब सात बजे प्रशासन की ओर से मरीज की सूचना मिली थी। उसके बाद तुरंत भर्ती की कार्रवाई कर इलाज शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि आरोपों की जांच कराई जाएगी।






