उत्तराखंड में मानसून की प्रचंड बारिश ने कहर बरपाया है। विशेष रूप से देहरादून जिले में देर रात बादल फटने से भारी तबाही मची है। प्रेमनगर क्षेत्र के परवल टॉस नदी में खनन कार्य में लगे लगभग दस मजदूर बह गए हैं। घटनास्थल से मिली जानकारी के अनुसार, छह मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। पुलिस पंचायतनामा की कार्रवाई नए गांव चौकी क्षेत्र में की जा रही है। टपकेश्वर के पास भगत सिंह कॉलोनी में स्थित शिखर फॉल में चार लोगों के बहने की भी सूचना मिली है। वहीं, गुच्चू पानी में बाढ़ के कारण एक स्कूटी मलबे में दब गई है। विकासनगर के कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल है। मृतक व घायल की पहचान कर ली गई है।
मौसम विभाग का येलो अलर्ट – राज्यभर में भारी बारिश के संकेत
मौसम विज्ञान केंद्र ने देहरादून, चमोली, चंपावत, ऊधमसिंह नगर, बागेश्वर और नैनीताल जिलों में तेज दौर की बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। अन्य जिलों में भी भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, आगामी 21 सितंबर तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लगातार तेज बारिश की चेतावनी बनी हुई है। इसके चलते भूस्खलन, बाढ़, जलभराव और अन्य आपदा संबंधी घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का त्वरित संज्ञान – सीएम धामी से की विस्तृत चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से दूरभाष पर आपदा की गंभीर स्थिति की जानकारी ली। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने प्रभावित लोगों के लिए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक मशीनरी को युद्धस्तर पर सक्रिय कर राहत व बचाव कार्य तेज़ी से संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री खुद प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रभावित परिवार को असुविधा न हो, हर घर तक राहत सामग्री, भोजन, सुरक्षित ठहराव, पीने का पानी, स्वास्थ्य सुविधाएं और जरूरी मदद उपलब्ध कराई जाए।
एसडीआरएफ का शानदार रेस्क्यू ऑपरेशन – 200 छात्र सुरक्षित निकाले गए
देहरादून के पौंधा क्षेत्र में देवभूमि इंस्टिट्यूट परिसर में भारी जलभराव के कारण लगभग 200 छात्र-छात्राएं फंसे हो गए थे। एसडीआरएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल पर पहुंचकर सूझबूझ व दक्षता से सभी छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। यह रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी तरह से सफल रहा। एसडीआरएफ उत्तराखंड के जवानों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी बहादुरी का परिचय दिया।
देवप्रयाग में भूस्खलन से भारी तबाही – सड़कें अवरुद्ध, पेट्रोल पंप व मंदिर को नुकसान
देवप्रयाग क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भीषण भूस्खलन हुआ। बस अड्डे के पास सड़क अवरुद्ध हो गई है, रघुनाथ मंदिर के पीछे कमरे ढह गए हैं। बद्रीनाथ-ऋषिकेश हाईवे बंद हो गया है। पेट्रोल पंप को भी भारी नुकसान पहुंचा है। डोईवाला में कई घरों में पानी भर गया है। चंद्रभागा नदी में फंसे तीन लोगों को एसडीआरएफ ने सुरक्षित निकाल लिया। वहीं करलिगाड़ क्षेत्र में दो लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
मसूरी के झड़ीपानी टोल पर भी भूस्खलन हुआ, जहां दो मजदूर मलबे में दबे। इनमें से एक मजदूर की मौत हो चुकी है जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल है।
यातायात व्यवस्था में बड़े बदलाव – प्रशासन ने लिया सख्त कदम
डीएम सविन बंसल और एसडीएम कुमकुम जोशी राहत एवं बचाव कार्य की कमान संभाल चुके हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, लोनिवि और अन्य विभाग पूरी तरह से सक्रिय हैं। राज्य के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्ट किया गया है ताकि राहत कार्य निर्बाध तरीके से चल सके। प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुँच कर लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहा है।
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