मातृशक्ति के सम्मान और उत्थान के लिए सीएम धामी का संकल्प
देहरादून। वीरांगना तीलू रौतेली के जन्मोत्सव के अवसर पर गुरुवार को सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में राज्य स्त्री शक्ति ‘तीलू रौतेली पुरस्कार’ और ‘आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार’ वितरण समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की मंत्री रेखा आर्या ने संयुक्त रूप से किया।
मातृशक्ति को प्रोत्साहन
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार महिलाओं के उत्थान और समाज में उनकी भागीदारी को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है। धामी सरकार ने पुरस्कारों की प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर इसे और सशक्त बनाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति समाज की वास्तविक आधारशिला है और राज्य के विकास में उनकी अहम भूमिका है।
महिलाओं व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान
इस अवसर पर प्रदेश की 13 जिलों की 13 महिलाओं एवं युवतियों को राज्य स्त्री शक्ति ‘तीलू रौतेली पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। वहीं 33 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार’ प्रदान किए गए।
सभी सम्मानित महिलाओं और कार्यकर्ताओं को प्रतीक चिह्न, शॉल, प्रमाण पत्र और 51-51 हजार रुपये की धनराशि डिजिटल हस्तांतरण के माध्यम से प्रदान की गई।
विभिन्न क्षेत्रों से चयनित प्रतिभाएं
सम्मानित होने वाली महिलाओं ने शिक्षा, खेल, संस्कृति, लोकगायन, साहित्य, समाज सेवा, कला व क्राफ्ट, आजीविका संवर्द्धन, स्वच्छता और साहसिक कार्य जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल की हैं।
तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त करने वाली प्रतिभागी
मीता उपाध्याय (अल्मोड़ा) – सामाजिक क्षेत्र
अलिशा मनराल (बागेश्वर) – खेल
सुरभि (चमोली) – साहित्य
अनामिका बिष्ट (चंपावत) – खेल
शिवानी गुप्ता – खेल व समाज सेवा
रूमा देवी (हरिद्वार) – खेल
नैना (नैनीताल) – खेल
रोशमा देवी (पौड़ी) – सामाजिक क्षेत्र
रेखा भट्ट (पिथौरागढ़) – सामाजिक क्षेत्र
हेमा नेगी करासी (रुद्रप्रयाग) – लोकगायन
साक्षी चौहान (टिहरी) – खेल
रेखा (ऊधमसिंह नगर) – खेल
विजय लक्ष्मी जोशी (उत्तरकाशी) – सामाजिक क्षेत्र
समारोह का महत्व
यह आयोजन महिला सशक्तीकरण और बाल विकास विभाग की ओर से हर साल आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य समाज में प्रेरणादायी कार्य कर रही महिलाओं को पहचान और सम्मान देना है ताकि वे अन्य लोगों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकें।






