प्रशासन की विशेष निगरानी से टला संकट
नैनीताल जिला प्रशासन ने मानसून काल में आपदा जैसी परिस्थितियों के दौरान गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विशेष योजना बनाई थी। इसी पहल का सकारात्मक असर देखने को मिला जब ओखलकांडा क्षेत्र की सरिता देवी को प्रसव पीड़ा की आशंका के बीच आधी रात को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया।
मौसम अलर्ट के बीच आई सूचना
दो सितंबर को जब जनपद में मौसम का “रेड अलर्ट” जारी था, तभी जिला आपदा कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि दूरस्थ ग्राम ज्योस्युडा की गर्भवती महिला सरिता देवी की डिलीवरी की तिथि नजदीक है। हालाँकि उस समय उन्हें दर्द नहीं था, लेकिन अचानक जटिल स्थिति उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की।
एसडीएम व आपदा अधिकारी ने संभाला मोर्चा
प्रकरण सामने आते ही उप जिलाधिकारी धारी केएन गोस्वामी और आपदा प्रबंधन अधिकारी कमल सिंह मेहरा ने विशेष अभियान शुरू किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल, लोक निर्माण विभाग भवाली व पीएमजीएसवाई से समन्वय कर महिला को सुरक्षित स्थान तक लाने की योजना बनाई गई।
जेसीबी और ग्रामीणों की मदद से बना रास्ता
रात का समय और भीड़ापानी से ज्योस्युडा तक का मार्ग अवरुद्ध होने के बावजूद पीडब्ल्यूडी की टीम ने जेसीबी के सहारे रास्ता खोलने की कोशिश की। बीच रास्ते बलना के पास रोड वाश आउट होने से जेसीबी आगे नहीं बढ़ सकी। ऐसे में स्थानीय प्रधान और ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि अवरुद्ध स्थान को महिला के पैदल गुजरने लायक बनाया जाए।
आधी रात में पार कराया गया मार्ग
जेसीबी चालक और स्थानीय नागरिकों की मदद से रात करीब 12 बजे महिला को अवरुद्ध रास्ते के एक ओर तक लाया गया। फिर डॉक्टर, आशा कार्यकर्ता और परिजनों के सहयोग से सरिता देवी को सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाया गया। रात्रि 12:30 बजे उन्हें 108 एम्बुलेंस में बैठाकर पदमपुरी चिकित्सालय की ओर रवाना किया गया।
अस्पताल में की गई जांच
लगभग 2:30 बजे महिला को पदमपुरी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्रभारी चिकित्सक डॉ. हिमांशु ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में पाया गया कि प्रसव की तिथि अभी कुछ दिन बाद की है। महिला की स्थिति सामान्य होने पर उन्हें अगले दिन हल्द्वानी स्थित अपने रिश्तेदारों के पास भेजा गया, जहां वे सुरक्षित ठहरी हुई हैं और स्वास्थ्य विभाग निरंतर संपर्क में है।
पूरी रात सक्रिय रहा प्रशासन
इस दौरान जिला प्रशासन और आपदा कंट्रोल रूम की टीम लगातार मॉनिटरिंग करती रही। 108 एम्बुलेंस कर्मियों ने भी धैर्यपूर्वक महिला का देर रात तक इंतजार किया। वहीं पदमपुरी अस्पताल में मेडिकल टीम पूरी तैयारी के साथ डटी रही।
यह अभियान इस बात का उदाहरण है कि आपदा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से एक गर्भवती महिला को सुरक्षित अस्पताल तक पहुँचाया गया।
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