तपोवन निवासी सरिता ने अपनी तीन छोटी बहनों की शिक्षा के लिए जिलाधिकारी से मदद की गुहार लगाई। मां के निधन और पिता की बेरोजगारी के चलते बहनों की पढ़ाई बीच में ही रुक गई थी। सरिता की भावुक अपील सुनकर जिलाधिकारी सविन बंसल ने न केवल तत्परता दिखाई बल्कि बच्चियों के भविष्य की जिम्मेदारी भी उठाई।
मां का साया खोने के बाद टूटी उम्मीदें
सोचिए, जिन मासूम बच्चियों के सिर से मां का आंचल उठ जाए और पिता भी बेरोजगार हों, उनका भविष्य कैसा होगा? जीना भी मुश्किल हो जाता है और पढ़ाई-लिखाई तो दूर की बात रह जाती है। ऐसी ही स्थिति से जूझ रही थी तपोवन निवासी सरिता और उसकी तीन छोटी बहनें। मजबूरी में सरिता अपनी व्यथा लेकर जिलाधिकारी के पास पहुंची।
तीनों बहनों का हुआ दाखिला, मिली पढ़ाई की नई राह
सरिता ने बताया कि मां के गुजर जाने और पिता की निष्क्रियता की वजह से उसकी बहनों की पढ़ाई छूट गई थी। यह सुनकर जिलाधिकारी भी भावुक हो उठे और तुरंत समाधान निकाला। उन्होंने आदेश जारी कर तीनों बहनों का राजकीय प्राथमिक विद्यालय लाडपुर में दाखिला कराया। बच्चियों को यूनिफॉर्म, बैग और अन्य शिक्षण सामग्री भी मुहैया कराई गई ताकि वे निर्बाध रूप से अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
सरिता के लिए भी बनाई रोजगार की राह
हालांकि, सवाल यह था कि बहनों की जिम्मेदारी अकेले सरिता कैसे उठाएगी? इस समस्या का हल भी जिलाधिकारी ने ढूंढ निकाला। उन्होंने जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक को निर्देश दिए कि सरिता को रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़ा जाए और उसे आत्मनिर्भर बनाया जाए। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही सरिता प्रशिक्षण लेकर रोजगार से जुड़ जाएगी।
शिक्षा है उज्ज्वल भविष्य की कुंजी
जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों का भविष्य संवारने के लिए शिक्षा सबसे बड़ा साधन है। प्रत्येक बेटी को पढ़ाना जिला प्रशासन का प्राथमिक लक्ष्य है और इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।
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