उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर क्राइम टीम ने करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का बड़ा खुलासा किया है। टीम ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने फर्जी कंपनी बनाकर निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों की ठगी की। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ित से निवेश कराकर भारी मुनाफे का लालच देकर करीब 66 लाख रुपये हड़प लिए।
ऐसे रचा गया ठगी का जाल
आरोपियों ने “एनजी ट्रेडर्स” नाम से एक फर्जी कंपनी बनाई और इसके नाम पर बैंक खाते खुलवाए। इतना ही नहीं, कंपनी के नाम से कई सीयूजी नंबर भी इस्तेमाल किए गए। साथ ही उनका संपर्क विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों से भी जुड़ा हुआ था। देशभर के अलग-अलग बैंकों में इनके 18 से 20 करंट खाते संचालित होने की बात भी सामने आई है।
आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस ने इस मामले में दो शातिरों को गिरफ्तार किया है। इनमें नितिन गौर (34) पुत्र शीतल प्रसाद गौर, निवासी मकान नंबर-26, गली नंबर-8, सदरपुर, सेक्टर-45, नोएडा और निक्कू बाबू (29) पुत्र कैलाश बाबू, निवासी मकान नंबर-465, गली नंबर-15, सदरपुर, सेक्टर-45, नोएडा शामिल हैं।
सोशल मीडिया से दिया लालच
ठगी के लिए आरोपियों ने फेसबुक पर “CryptoPromarkets” नाम से विज्ञापन और लिंक प्रसारित किया। लिंक पर क्लिक करने के बाद रजिस्ट्रेशन कराया जाता, जिससे निवेशकों को यह भरोसा दिलाया जाता कि यह एक वैध और अधिकृत इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म है।
आरोपियों ने खुद को प्रिया, रमेश कुमार, शरद वोहरा और विक्की मल्होत्रा के नाम से पेश किया और अलग-अलग मोबाइल नंबरों व ईमेल आईडी के जरिए पीड़ित से संपर्क साधा। खुद को कंपनी का अधिकृत अधिकारी और कर्मचारी बताकर उन्होंने भरोसा जीता। इसके बाद निवेश पर मोटे लाभ का झांसा देकर लगातार रकम जमा करवाते रहे।
22 दिनों में 66 लाख रुपये की ठगी
पीड़ित से 7 जुलाई 2025 से 29 जुलाई 2025 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹66,21,000 जमा करवाए गए। जब रकम हड़प ली गई तो लाभांश देने से इनकार कर दिया गया और संपर्क से बचने लगे। इसके बाद पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उसने मामले की शिकायत की।
पुलिस अब आरोपियों के विदेशी कनेक्शन और उनके बैंक खातों की जांच में जुटी हुई है।
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