अचानक गिरी चट्टान, दहशत में आए लोग
नैनीताल के रानीबाग-भीमताल मोटर मार्ग पर बने नए पुल के पास शनिवार सुबह मलबा गिरने से अफरा-तफरी मच गई। सुबह करीब साढ़े सात बजे अचानक जोरदार धमाके के साथ पहाड़ का हिस्सा टूटकर सड़क और पुल की एप्रोच रोड पर आ गिरा। तेज आवाज सुनते ही आसपास के लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए।
यातायात हुआ प्रभावित, जाम से बढ़ी परेशानी
मलबा गिरने से सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। बस, ट्रक और छोटे वाहन सभी फंस गए। जाम खुलवाने के लिए पुलिस ने यातायात डायवर्ट किया, लेकिन जल्दबाजी में पुराने पुल से ही भारी वाहनों को निकाल दिया गया। यह पुल लगभग 60 साल पुराना है और उस पर बड़े वाहनों का दबाव गंभीर हादसे की आशंका पैदा कर रहा था।
शिक्षिकाओं से भरा ऑटो बाल-बाल बचा
घटना के समय एक ऑटो में शिक्षिकाएं बैठकर मार्ग से गुजर रही थीं। उनके सामने अचानक मलबा गिरा तो चालक ने तुरंत ऑटो को बैक कर लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। वहीं, एक बाइक सवार तो चंद सेकंड पहले ही उस जगह से गुजरकर आगे निकल गया था।
दुकानदारों को भी हुआ नुकसान
मलबा गिरने से न केवल सड़क बंद रही बल्कि दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित हुआ। कई लोगों को अपनी दुकानें खोलने तक का मौका नहीं मिला।
स्थानीय लोगों ने बताई आपबीती
संजय सिंह नयाल ने बताया, “तेज आवाज सुनते ही हम सभी लोग बाहर निकल आए। देखा तो पहाड़ का हिस्सा टूटकर पुल के पास गिरा हुआ था। सुबह से ही बारिश के कारण मलबा धीरे-धीरे खिसक रहा था।”
हरीश मेहरा का कहना है, “मलबा गिरने के बाद सड़क जाम हो गई। कुछ घंटे तक हालात बिगड़े रहे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मुख्य सड़क से वाहनों को डायवर्ट किया तब जाकर यातायात सामान्य हो पाया।”
पंकज गुप्ता, जो सड़क किनारे भुट्टे की दुकान लगाते हैं, बोले, “मैं नाश्ता कर रहा था तभी जोरदार आवाज आई। घबराकर बाहर निकला तो देखा मलबा सड़क पर गिर गया है। आज दुकान भी नहीं खोल पाया।”
कन्नू तिवारी ने कहा, “मैं बच्चे को स्कूल छोड़कर लौटा ही था कि तभी मलबा पूरी तरह गिर गया। अगर कुछ मिनट देर हो जाती तो बड़ा खतरा हो सकता था।”
पवन बिष्ट, स्थानीय दुकानदार, ने बताया, “जब भी मलबा गिरता है मैं तुरंत लोनिवि के इंजीनियरों को सूचना देता हूं। इस बार भी जानकारी देने के कुछ देर बाद ही जेसीबी मशीन मौके पर पहुंच गई और रास्ता साफ करने का काम शुरू कर दिया।”
प्रशासन अलर्ट, लेकिन सवाल भी खड़े
मलबा हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया, लेकिन घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना सुरक्षा इंतज़ामों के भारी वाहनों को पुराने पुल से क्यों निकाला गया? यदि उस दौरान पुल पर दबाव बढ़ता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
यह भी पढें- उत्तराखंड सरकार ने तय की स्कूल प्रवेश की आयु सीमा, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई






