अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

उत्तराखंड में धामी मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारियां तेज,पदों पर दावेदारी को लेकर बढ़ी दौड़

On: August 26, 2025 7:45 AM
Follow Us:

उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर हलचल भरे दौर में प्रवेश करने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट में जल्द ही विस्तार और फेरबदल दोनों देखने को मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि इस बदलाव का आधार मौजूदा मंत्रियों का प्रदर्शन, उनके विधानसभा क्षेत्रों की स्थिति और एंटी इनकंबेंसी फैक्टर रहेगा। साथ ही नए चेहरों को शामिल कर क्षेत्रीय व सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की जाएगी।

भाजपा संगठन में भी हलचल

मंत्रिमंडल से पहले भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी में बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि संगठन में करीबियों को स्थान दिलाने और खाली पड़े पदों को भरने को लेकर दिग्गज नेताओं में खींचतान बढ़ गई है। प्रदेश संगठन की नई कार्यकारिणी का गठन लगभग तय माना जा रहा है।

दिल्ली से देहरादून तक सक्रियता

दिल्ली से लेकर प्रदेश तक भाजपा के सांसद, पूर्व सांसद और यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री तक अचानक सक्रिय हो उठे हैं। इसे मंत्रिमंडल और संगठनात्मक बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्तमान में राज्य मंत्रिमंडल में पांच पद खाली हैं।

धामी मंत्रिमंडल में रिक्त पदों का इतिहास

जब वर्ष 2022 में पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, उस समय से ही उनके मंत्रिमंडल में तीन स्थान रिक्त थे। अप्रैल 2023 में कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास के निधन के बाद एक और स्थान खाली हो गया। वहीं मार्च 2024 में कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे ने एक और रिक्ति बढ़ा दी। इन दोनों पदों की जिम्मेदारी इस समय खुद मुख्यमंत्री धामी संभाल रहे हैं। उनके पास फिलहाल 35 से ज्यादा विभागों का कार्यभार है।

चुनावी रणनीति की दृष्टि से बदलाव

साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और अब बहुत अधिक समय शेष नहीं बचा है। ऐसे में पार्टी हाईकमान संगठन और मंत्रिमंडल के रिक्त पदों को भरने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और राज्य के सांसदों की केंद्रीय नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकों हो चुकी हैं।

गुटबाजी भी आई सामने

जैसे ही संगठन और मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चा शुरू हुई, भाजपा के भीतर गुटबाजी और आंतरिक राजनीति भी तेज हो गई। कई सांसद और नेता, जो लंबे समय से आपसी मतभेदों के कारण दूरी बनाए हुए थे, अब संबंधों में सुधार की कोशिश करते दिख रहे हैं। आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला, हालांकि हाईकमान की सख्ती के कारण यह ज्यादा प्रभावी नहीं हो सका।

कुल मिलाकर उत्तराखंड की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। धामी मंत्रिमंडल का विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल भाजपा के आगामी चुनावी समीकरणों को साधने की अहम रणनीति मानी जा रही है।

यह भी पढें- Rishikesh: ट्रेन छूटते ही महिला को शुरू हुई प्रसव पीड़ा, हावड़ा एक्सप्रेस के कोच में जन्मी बच्ची

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment