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Uttarakhand News: अब होटलों और रेस्टोरेंट्स में बच्चों के लिए दूध गर्म करने से नहीं किया जाएगा इनकार

On: August 25, 2025 10:00 AM
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देहरादून/हरिद्वार। अब उत्तराखंड आने वाले परिवारों को अपने छोटे बच्चों के लिए दूध गर्म करवाने में किसी तरह की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सभी जिलाधिकारियों और जिला पर्यटन अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश के मुताबिक प्रदेश के किसी भी होटल या रेस्टोरेंट संचालक को बच्चों के लिए दूध गर्म करने से मना करने की अनुमति नहीं होगी।

यह मामला हरिद्वार निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मनोज निषाद की शिकायत के बाद सामने आया। उन्होंने आयोग को जानकारी दी थी कि 25 जून 2025 को जब वे हरिद्वार से ऋषिकेश की यात्रा पर थे, तो रास्ते में एक रेस्टोरेंट में अपने तीन साल के बच्चे के लिए दूध गर्म करने का अनुरोध किया। लेकिन वहां मौजूद कर्मचारियों ने उनकी बात मानने से साफ इंकार कर दिया।

इस घटना के बाद उन्होंने पूरे मामले की लिखित शिकायत बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भेजी। आयोग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 19 जुलाई 2025 को आदेश जारी किया कि अब राज्यभर में होटल और रेस्टोरेंट संचालक छोटे बच्चों को दूध गर्म करने से मना नहीं करेंगे।

आयोग के आदेश का पालन सबसे पहले रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों में शुरू हुआ। 28 जुलाई को रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी ने आयोग को रिपोर्ट भेजकर आदेश लागू करने की जानकारी दी, वहीं 5 अगस्त को पिथौरागढ़ जिलाधिकारी ने भी आयोग को रिपोर्ट दी कि उनके जिले में होटल और रेस्टोरेंट संचालक अब इस व्यवस्था का पालन कर रहे हैं।

मनोज निषाद ने कहा कि उत्तराखंड में बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु अपने बच्चों के साथ यात्रा पर आते हैं। ऐसे में कई बार माता-पिता दूध तो अपने साथ रखते हैं, लेकिन उसे गर्म करवाने की सुविधा न मिलने से परेशानी झेलनी पड़ती है। खासकर छोटे बच्चों को समय पर गर्म दूध न मिलने पर वे असहज हो जाते हैं और माता-पिता तनाव में आ जाते हैं।

उन्होंने बताया कि अक्सर होटल और रेस्टोरेंट संचालक बहाने बनाकर जिम्मेदारी लेने से बचते हैं, जबकि माता-पिता दूध गर्म करने के लिए पैसे देने को भी तैयार रहते हैं। लेकिन अब आयोग के आदेश के बाद यह समस्या खत्म हो जाएगी और प्रदेश में आने वाले परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।

मनोज निषाद का कहना है कि इस फैसले से उत्तराखंड की छवि और बेहतर होगी, क्योंकि यह कदम बच्चों और परिवारों की सुविधा को ध्यान में रखकर उठाया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही सभी जिलों में यह आदेश प्रभावी रूप से लागू होगा।

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