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देहरादून: आवारा कुत्तों के हमलों पर लगाम लगाने की तैयारी, एबीसी सेंटर की क्षमता होगी तीन गुना

On: August 23, 2025 9:45 AM
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राजधानी देहरादून में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों से परेशान लोगों को जल्द राहत मिलने वाली है। नगर निगम ने इस समस्या से निपटने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर ली है। अब एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर की क्षमता को तीन गुना तक बढ़ाने, कुत्ता शिकायत प्रकोष्ठ बनाने और टोल-फ्री नंबर जारी करने की तैयारी चल रही है। साथ ही, आक्रामक कुत्तों की पहचान कर उन्हें लंबे समय तक आश्रय गृह में रखने की भी योजना है।

एबीसी सेंटर की क्षमता होगी तीन गुना

फिलहाल निगम के एबीसी सेंटर में 70 कुत्तों को रखने की व्यवस्था है, जिसे बढ़ाकर 200 से अधिक किया जाएगा। इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। निगम के मुताबिक, आक्रामक और हमलावर कुत्तों को सेंटर में रखकर उनका उपचार किया जाएगा और शांत स्वभाव होने पर ही वापस छोड़ा जाएगा।

कुत्ता शिकायत प्रकोष्ठ और टोल-फ्री नंबर

लोगों को आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्याओं की रिपोर्ट करने के लिए जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर जारी किया जाएगा। इसके साथ ही नगर निगम में विशेष कुत्ता शिकायत प्रकोष्ठ भी बनाया जाएगा।

बंध्याकरण और टीकाकरण अभियान

नगर निगम के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वरुण अग्रवाल के अनुसार, वर्ष 2016 से अब तक करीब 53 हजार आवारा कुत्तों का बंध्याकरण और टीकाकरण हो चुका है। इसके बावजूद अभी लगभग 20 प्रतिशत कुत्तों की नसबंदी बाकी है। निगम का कहना है कि अब बंध्याकरण अभियान की रफ्तार और तेज की जाएगी।

जिम्मेदारी तय होगी कुत्तों को खिलाने वालों की

निगम की नई नीति के तहत अब ऐसे लोग भी जिम्मेदार माने जाएंगे जो नियमित रूप से आवारा कुत्तों को भोजन कराते हैं। यदि उनके खिलाए गए कुत्ते राहगीरों पर हमला करते हैं तो उन्हें कुत्ते का मालिक माना जाएगा। इस स्थिति में 1000 से 2000 रुपये तक का जुर्माना वसूला जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइन से मिली राहत

पहले नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के पुराने दिशा-निर्देशों के कारण हमलावर कुत्तों को उनके इलाके से नहीं हटा पाता था और केवल बंध्याकरण व टीकाकरण तक ही सीमित रहता था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइन के तहत आक्रामक कुत्तों को पकड़कर आश्रय गृह में रखने की अनुमति मिल गई है। महापौर सौरभ थपलियाल ने बताया कि इससे निगम को कार्रवाई करने में आसानी होगी और शहरवासियों को राहत मिलेगी।

जागरूकता अभियान और पंजीकरण कैंप

नगर आयुक्त नमामी बंसल ने निर्देश दिए हैं कि शहरभर में पोस्टर-बैनर और बैठकों के जरिए जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए। साथ ही हर रविवार किसी एक सोसाइटी में कुत्ता पंजीकरण कैंप लगाया जाएगा। इससे खतरनाक नस्ल के कुत्तों की पहचान और निगरानी करना आसान होगा।

नौ साल में सवा पांच करोड़ का खर्च

बीते नौ वर्षों में नगर निगम आवारा कुत्तों की नसबंदी पर करीब सवा पांच करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। निगम के मुताबिक, एक कुत्ते के बंध्याकरण पर लगभग 1000 रुपये का खर्च आता है।

निगम की मुख्य कार्ययोजना

आक्रामक कुत्तों को पकड़कर एबीसी सेंटर में रखना

नसबंदी और टीकाकरण की गति बढ़ाना

पालतू कुत्तों के पंजीकरण नियम सख्त करना

आवारा कुत्तों को भोजन कराने वालों की जवाबदेही तय करना

शहरभर में जन-जागरूकता अभियान चलाना

अब देहरादून नगर निगम का दावा है कि इन कदमों से जल्द ही आवारा कुत्तों की समस्या पर काबू पाया जा सकेगा और शहरवासियों को राहत मिलेगी।

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