उत्तराखंड सरकार राज्य में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को नियंत्रित और वैधानिक रूप देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए गेमिंग एक्ट का मसौदा तैयार कर लिया गया है, जिस पर विधि एवं न्याय विभाग से राय ली जा रही है। माना जा रहा है कि आगामी कैबिनेट बैठक में इसे पेश किया जाएगा और फिर विधानसभा सत्र में विधेयक के रूप में लाया जाएगा।
ऑनलाइन गेमिंग को मिलेगा कानूनी ढांचा
प्रदेश सरकार का मानना है कि इंटरनेट मीडिया के बढ़ते दायरे में ऑनलाइन गेमिंग का बाजार तेजी से पांव पसार रहा है। कई एप्स और वेबसाइट्स इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, जहां लोग अपने अनुमान और कौशल के आधार पर दांव लगाकर पैसा कमाने की कोशिश कर रहे हैं। इस पर नियंत्रण और वैधानिक व्यवस्था बनाने के लिए नया कानून लाया जा रहा है।
केंद्र के निर्देश पर बनी पहल
केंद्र सरकार ने दो वर्ष पूर्व सभी राज्यों को अपने-अपने हालात को देखते हुए ऑनलाइन गेमिंग पर कानून बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद देश के कुछ राज्यों ने इस तरह का कानून लागू भी कर दिया है। अब उत्तराखंड सरकार भी उसी दिशा में कदम बढ़ा रही है। गृह विभाग इसकी रूपरेखा तैयार कर रहा है और अन्य राज्यों के एक्ट का अध्ययन कर इसमें संशोधन कर मसौदा बनाया गया है।
लाइसेंस और राजस्व का बढ़ेगा दायरा
नए कानून के तहत ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को लाइसेंस जारी किए जाएंगे। चूंकि यह मनोरंजन की श्रेणी में आता है, इसलिए इस पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य के राजस्व में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होगी। वहीं, लाइसेंसधारी कंपनियों को भी कानूनी मान्यता मिलने से उनका दायरा बढ़ेगा।
जुए पर प्रतिबंध जारी रहेगा
फिलहाल पूरे देश में गैंबलिंग एक्ट लागू है, जिसमें कौशल आधारित खेल (Game of Skill) को छूट दी गई है। उत्तराखंड सरकार भी इसी आधार पर गेमिंग एक्ट बनाने की योजना बना रही है। हालांकि, समूह में बैठकर खेले जाने वाले पारंपरिक या सार्वजनिक जुए पर प्रतिबंध पहले की तरह जारी रहेगा।
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