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लद्दाख की तर्ज पर उत्तराखंड में शुरू होगी हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए CM धामी ने दिए अधिकारियों को निर्देश

On: July 7, 2025 4:17 PM
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देहरादून। साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड सरकार अब लद्दाख की तर्ज पर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन का आयोजन करने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अपने आवास स्थित कैंप कार्यालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को इस महत्वाकांक्षी पहल के सफल क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन से उत्तराखंड की पहचान साहसिक पर्यटन के प्रमुख गंतव्य के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होगी। यह मैराथन कुमाऊं क्षेत्र में गुंजी से आदि कैलाश और गढ़वाल क्षेत्र में नीती-माणा से मलारी तक आयोजित की जाएगी। आयोजन स्थल समुद्र तल से तीन हजार से साढ़े चार हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित होंगे, जहां धावक दुर्गम पर्वतीय मार्गों से गुजरते हुए दौड़ लगाएंगे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस मैराथन को राज्य के वार्षिक पर्यटन कैलेंडर में शामिल किया जाए और प्रत्येक वर्ष निर्धारित तिथियों पर इसका आयोजन सुनिश्चित किया जाए। पहला आयोजन आगामी अक्टूबर माह के मध्य में प्रस्तावित है, जबकि दूसरा आयोजन अगले वर्ष मई-जून के बीच किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन से प्रदेश में साहसिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी और स्थानीय ग्रामीणों के लिए आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे। मैराथन के दौरान होम स्टे, गाइड सेवाएं और अन्य स्थानीय सेवाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित लोगों को राहत राशि समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके साथ ही सीमावर्ती और पर्वतीय क्षेत्रों में वन्यजीवों द्वारा फसलों को नुकसान से बचाने के लिए घेरबाड़, सोलर फेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली और अपर सचिव बंशीधर तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस तरह की साहसिक गतिविधियों से न केवल राज्य के पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर भी बेहतर होगा।

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