देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 100 मेगावाट क्षमता वाले बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना का उद्देश्य सौर ऊर्जा के सतत उपयोग को सुनिश्चित करना है, जिससे विशेष रूप से शाम और रात्रि के समय ऊर्जा आपूर्ति में कोई बाधा न आए।
राज्य में वर्तमान में दिन के समय सौर ऊर्जा का अच्छा उत्पादन हो रहा है, लेकिन रात के समय जब बिजली की मांग अधिक होती है, तब सौर ऊर्जा का लाभ नहीं मिल पाता। इस कमी को दूर करने के लिए बीईएसएस एक प्रभावी समाधान के रूप में सामने आया है। ऊर्जा निगम के निदेशक मंडल की बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में इस परियोजना को मंजूरी दी गई।
उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2027 तक 2500 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। फिलहाल राज्य में 250 मेगावाट से अधिक सौर ऊर्जा संयंत्र पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। अब बैटरी स्टोरेज सिस्टम के माध्यम से इन संयंत्रों से दिन में उत्पादित ऊर्जा को स्टोर कर रात के समय उपयोग किया जा सकेगा। इससे प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा का समुचित और लगातार उपयोग संभव होगा।
बैठक में इस परियोजना के लिए सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने हेतु विभिन्न वित्तीय संस्थानों से प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों का तुलनात्मक विश्लेषण कर निर्णय लेने के निर्देश भी दिए गए। इससे परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता को मजबूत आधार मिलेगा।
76 हजार से अधिक ट्रांसफॉर्मर में लगेंगे कैपेसिटर बैंक, सीमांत गांव जुड़ेंगे ग्रिड से
ऊर्जा निगम के निदेशक मंडल की 124वीं बैठक में प्रदेशभर में ट्रांसफॉर्मरों में 76 हजार से अधिक कैपेसिटर बैंक लगाए जाने को भी मंजूरी दी गई। इससे वोल्टेज की गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्युत आपूर्ति अधिक स्थिर व भरोसेमंद बनेगी।
बैठक में सीमांत क्षेत्रों के उन गांवों को भी ग्रिड से जोड़ने के निर्देश दिए गए, जो अभी केवल सौर ऊर्जा के माध्यम से विद्युत आपूर्ति पा रहे हैं। इससे इन दुर्गम क्षेत्रों में भी स्थायी और अधिक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
बैठक में यह भी बताया गया कि बीते तीन वर्षों में ऊर्जा निगम के राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और उपभोक्ता रैंकिंग में भी सुधार दर्ज किया गया है। साथ ही एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल लॉस (एटीएंडसी लॉस) में भी लगातार कमी आई है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र की दक्षता बढ़ी है।
निदेशक मंडल में तकनीकी विशेषज्ञ की नियुक्ति, सितंबर 2025 तक ईआरपी स्थिरीकरण का लक्ष्य
बैठक में यह भी तय किया गया कि विभिन्न ऊर्जा परियोजनाओं के तकनीकी पहलुओं के गहन विश्लेषण के लिए निदेशक मंडल में एक तकनीकी सदस्य की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा सितंबर 2025 तक एंटरप्राइज रिसोर्स प्लान (ईआरपी) सिस्टम को पूरी तरह से स्थिर करने के निर्देश दिए गए ताकि निगम का कार्य संचालन और अधिक प्रभावशाली बन सके।
बैठक में प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम, वित्त सचिव दिलीप जावलकर, निदेशक मंडल के सदस्य बीपी पांडेय व पराग गुप्ता, ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार, पिटकुल के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी तथा जलविद्युत निगम के प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
यह भी पढें- Uttarakhand News: समान नागरिक संहिता में संशोधन, लागू होने के बाद नाबालिग से हुआ विवाह नहीं होगा पंजीकृत*






