भारत के विख्यात यात्रा लेखक ह्यूग गैंटजर को शनिवार को उनके मसूरी स्थित निवास पर पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें उनकी दिवंगत पत्नी और लेखन सहयोगी कोलेन गैंटजर के साथ साझा रूप में प्रदान किया गया। गैंटजर दंपती ने दशकों तक भारतीय संस्कृति, धरोहर और विविधता को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनके अस्वस्थ होने के कारण वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शैलेश बाघौली विशेष रूप से मसूरी पहुँचे और उन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान भेंट किया।
गैंटजर की लेखनी ने यात्रा वृत्तांत को केवल भौगोलिक विवरण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसमें ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गहराइयों को भी समाहित किया। उनका प्रसिद्ध स्तंभ ‘गैंटजर का यात्रा वृत्तांत’ और दूरदर्शन पर प्रसारित कार्यक्रमों ने देशभर के पाठकों व दर्शकों को भारत की आत्मा से रूबरू कराया। उनके वृत्तांतों में न सिर्फ स्थलों का चित्रण था, बल्कि वहां की रीतियों, लोकाचार और मानवीय पहलुओं का जीवंत वर्णन भी शामिल था।
ह्यूग की पैनी दृष्टि और कोलेन की भावनात्मक प्रस्तुति ने भारतीय यात्रा लेखन को एक नई दिशा दी। उन्होंने मिलकर लेखन को अनुभव और अन्वेषण का माध्यम बनाया। उनकी रचनाओं ने पाठकों को अपने ही देश को नए नजरिए से देखने की प्रेरणा दी और भारत के भीतर छिपी विविधताओं को उजागर किया।
उनके इस योगदान को सम्मानित करते हुए आधिकारिक बयान में कहा गया कि गैंटजर दंपती का कार्य केवल पर्यटन को प्रोत्साहित करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पद्मश्री सम्मान निःसंदेह उनके जीवन भर के समर्पण और लेखनी की प्रभावशीलता का सजीव प्रमाण है।
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