उत्तराखंड में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हो गई है। एकल सदस्यीय समर्पित आयोग द्वारा 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ग्राम पंचायतों में ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण किया गया है। जहां ओबीसी की जनसंख्या अधिक है, वहां उन्हें अधिक प्रतिनिधित्व भी मिला है।
विशेष रूप से उत्तरकाशी और ऊधमसिंह नगर जिलों में joओबीसी वर्ग को प्रधान पदों पर सर्वाधिक आरक्षण मिला है। आयोग का कहना है कि यह आरक्षण पूरी तरह से जनसंख्या अनुपात के अनुरूप निर्धारित किया गया है। यानी जिन जिलों में ओबीसी की आबादी ज्यादा है, वहां उनके लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी अधिक है। वहीं जिन जिलों में उनकी संख्या कम है, वहां आरक्षित सीटें भी सीमित हैं।
जिलावार प्रधान पदों पर ओबीसी आरक्षण की स्थिति:
| जिला | कुल प्रधान पद | ओबीसी के लिए आरक्षित |
|---|---|---|
| अल्मोड़ा | 1160 | 39 |
| ऊधमसिंह नगर | 373 | 71 |
| चंपावत | 312 | 16 |
| नैनीताल | 475 | 20 |
| पिथौरागढ़ | 681 | 41 |
| बागेश्वर | 405 | 20 |
| उत्तरकाशी | 521 | 95 |
| चमोली | 615 | 18 |
| टिहरी | 1049 | 69 |
| देहरादून | 409 | 34 |
| पौड़ी | 1166 | 25 |
| रुद्रप्रयाग | 333 | 11 |
जैसा कि आंकड़ों से स्पष्ट है, उत्तरकाशी जिले में 521 में से 95 प्रधान पद ओबीसी के लिए आरक्षित किए गए हैं। वहीं ऊधमसिंह नगर में 373 में से 71 पद ओबीसी वर्ग को मिले हैं।
प्रदेशभर में आरक्षित व अनारक्षित पदों का आंकड़ा:
राज्य में कुल 7499 ग्राम प्रधान पद हैं। इनमें से विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण इस प्रकार तय किया गया है:
- सामान्य वर्ग (अनारक्षित) – 2747 पद
- ओबीसी वर्ग – 457 पद
- अनुसूचित जाति (SC) – 1380 पद
- अनुसूचित जनजाति (ST) – 225 पद
- महिला व अन्य श्रेणियां – 2690 पद
इस तरह कुल 4752 पद आरक्षित हैं, जबकि 2747 पद अनारक्षित रखे गए हैं।
आयोग के अनुसार, यही आरक्षण व्यवस्था त्रिस्तरीय पंचायतों के अन्य पदों पर भी लागू होगी, ताकि सामाजिक संतुलन बना रहे और सभी वर्गों को पंचायत में भागीदारी का अवसर मिल सके।
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