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कांवड़ यात्रा: डीजीपी के आदेश, उत्तराखंड के संवेदनशील इलाकों में मांस और शराब की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित

On: June 25, 2025 5:05 PM
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कांवड़ मेले के सुचारु और शांतिपूर्ण संचालन को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दीपम सेठ ने बुधवार को अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी को और व्यापक बनाया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

डीजीपी ने निर्देश दिया कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी बॉडी वार्न कैमरा (कमीज में लगने वाले कैमरे) पहनें। इससे पुलिस की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

संवेदनशील इलाकों में मांस-मदिरा पर रोक

डीजीपी ने कांवड़ मेले के दौरान संवेदनशील स्थानों पर मांस और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था से जुड़ी इस यात्रा में किसी भी तरह का व्यवधान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पुलिस को सेवा भावना और सतर्कता से काम करने के निर्देश

पुलिस अधिकारियों को समर्पण, सतर्कता और सेवा की भावना के साथ ड्यूटी करने को कहा गया है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। डीजीपी ने पुलिस बल को निर्देश दिए कि वे यात्रियों से सम्मानजनक व्यवहार करें।

भीड़भाड़ वाले स्थलों पर विशेष निगरानी और सुरक्षा

हरकी पैड़ी, नीलकंठ मंदिर, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा योजना लागू की जाएगी। इन स्थानों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम की भी व्यवस्था की जाएगी, ताकि आवश्यक सूचनाएं समय पर श्रद्धालुओं तक पहुंच सकें।

सोशल मीडिया सेल को अभी से किया जाए सक्रिय

डीजीपी ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को तत्पर रहने को कहा है, जिससे किसी भी भड़काऊ या अफवाह फैलाने वाली पोस्ट पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही, सोशल मीडिया के माध्यम से प्रामाणिक और सकारात्मक जानकारी लगातार प्रसारित करने पर बल दिया गया।

इन बिंदुओं पर दिए गए स्पष्ट निर्देश:

बल की तैनाती: अनुभवी पुलिसकर्मियों, रिजर्व बल, महिला पुलिस और खुफिया इकाइयों को रणनीतिक स्थलों पर तैनात किया जाए। एटीएस और बम निष्क्रियकरण दस्ते भी एक्टिव रहें।

यातायात योजना: कांवड़ रूट, वैकल्पिक मार्ग और पार्किंग स्थलों का ट्रैफिक प्लान बनाकर इसका प्रचार सीमावर्ती राज्यों में फ्लैक्स, होर्डिंग और सोशल मीडिया से किया जाए।

डायवर्जन और पेट्रोलिंग: भारी वाहनों के लिए डायवर्जन प्लान बने, अस्थायी चौकियां लगाई जाएं, मोबाइल पेट्रोलिंग और पैदल व डाक कांवड़ियों के लिए सुरक्षित मार्ग तैयार हों।

इमरजेंसी रिस्पॉन्स: मेला नियंत्रण कक्ष में क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) 24 घंटे सक्रिय रखी जाए।

बुनियादी सुविधाएं: पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, मोबाइल शौचालय, विश्राम स्थल, शिविर व धर्मशालाओं की समुचित व्यवस्था स्थानीय प्रशासन के सहयोग से हो। इन जगहों पर ठहरने वालों का सत्यापन अनिवार्य किया जाए।

अत्यधिक भीड़ पर वैकल्पिक घाटों का प्रचार: हरिद्वार में भीड़ अधिक होने की स्थिति में अन्य घाटों को वैकल्पिक रूप से प्रचारित किया जाए।

सीमावर्ती जिलों के साथ समन्वय: सीमावर्ती जिलों और राज्यों के पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय बैठकें की जाएं। गुप्तचर रिपोर्ट के आधार पर एसओपी तैयार की जाए।

निष्कर्ष:
डीजीपी दीपम सेठ द्वारा दिए गए निर्देशों से यह स्पष्ट है कि इस बार कांवड़ मेले में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है। तकनीक के इस्तेमाल से लेकर मानवीय व्यवहार तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु निर्बाध रूप से अपनी यात्रा पूरी कर सकें।

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