देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने आशीर्वाद एन्क्लेव में आवासीय मानचित्र पर बन रहे बहुमंजिला फ्लैटों के निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह कार्रवाई तब हुई जब स्थानीय निवासी क्षेत्रीय पार्षद अंकित अग्रवाल के नेतृत्व में बिल्डरों की मनमानी के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। नागरिकों ने निर्माण कार्य को नियमों के विरुद्ध बताया और एमडीडीए से हस्तक्षेप की मांग की।
शुक्रवार को वार्ड 37 स्थित आशीर्वाद एन्क्लेव में भारी संख्या में लोग एकत्र हुए और बिल्डरों के खिलाफ प्रदर्शन किया। स्थानीय नागरिकों का कहना था कि संकरी गलियों और सीमित संसाधनों वाली कालोनी में पांच मंजिला फ्लैट बनाए जा रहे हैं, जिससे न केवल ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या बढ़ेगी, बल्कि आसपास के रहवासियों की दैनिक दिनचर्या भी प्रभावित होगी।
स्थानीय नागरिकों की शिकायत पर एमडीडीए के सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। प्राथमिक जांच में उन्होंने पाया कि जिस भूमि पर यह निर्माण हो रहा है, वह एकल आवासीय नक्शे के अंतर्गत आती है, लेकिन वहां दो अलग-अलग पांच मंजिला भवनों का निर्माण फ्लैट के रूप में किया जा रहा है। इस आधार पर उन्होंने तत्काल निर्माण कार्य रुकवाया और चेतावनी दी कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने यह भी जांच शुरू कर दी है कि निर्माण कार्य व्यक्तिगत उद्देश्य के लिए किया जा रहा है या यह व्यावसायिक (कमर्शियल) फ्लैट प्रोजेक्ट है। इसके अतिरिक्त, यह भी देखा जा रहा है कि क्या फ्लैटों के बीच साझा दीवार (कॉमन वॉल) बनाई गई है या नहीं। एमडीडीए अधिकारियों के अनुसार, मानचित्र की गहन समीक्षा की जा रही है और यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित प्रोजेक्ट को सील कर दिया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान आशीर्वाद एन्क्लेव समिति के अध्यक्ष चंद्र मोहन राणा, महासचिव संदीप संगल, मुकुल परासर, कमल दुरेजा, प्रदीप सिंह बिष्ट, अजय त्यागी, पूनम गुप्ता सहित अनेक नागरिक मौजूद रहे। सभी ने मिलकर मांग की कि आवासीय क्षेत्रों में बहुमंजिला फ्लैटों की अनुमति न दी जाए और इस विषय में स्थायी समाधान निकाला जाए।
पार्षद ने की मास्टर प्लान में बदलाव की मांग
वार्ड पार्षद अंकित अग्रवाल ने कहा कि वर्षों से बसी कॉलोनियों में बहुमंजिला फ्लैट निर्माण वहां की बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों पर भारी दबाव डालता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि ऐसी कॉलोनियों में फ्लैट के नक्शे किसी भी हालत में पास न किए जाएं। पार्षद ने जल्द ही इस मुद्दे को लेकर उच्चाधिकारियों से मिलने की बात भी कही है ताकि मास्टर प्लान में आवश्यक बदलाव कर पुराने रिहायशी क्षेत्रों की मूल संरचना को संरक्षित रखा जा सके।
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