देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य और आयुष विभाग में व्यापक स्तर पर प्रशासनिक बदलाव करते हुए निदेशक स्तर से लेकर वरिष्ठ चिकित्सकों तक कुल 31 अधिकारियों का तबादला किया है। तबादलों की इस सूची में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, स्वास्थ्य महानिदेशालय और विभिन्न जिलों के अस्पतालों में कार्यरत वरिष्ठ चिकित्सकों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
डॉ. मनु जैन को देहरादून जिला अस्पताल की कमान
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय में तैनात डॉ. मनु जैन को अब जिला चिकित्सालय देहरादून का प्रमुख चिकित्सा अधिकारी नियुक्त किया गया है।
पौड़ी और अल्मोड़ा को मिले नए सीएमओ
डॉ. शिव मोहन शुक्ला को पौड़ी जिले का मुख्य चिकित्साधिकारी बनाया गया है, जबकि डॉ. नवीन चंद्र तिवारी को अल्मोड़ा का प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी नियुक्त किया गया है।
स्वास्थ्य महानिदेशालय में भी बदलाव
शासनादेश के मुताबिक, डॉ. शिखा जंगपांगी को निदेशक स्वास्थ्य सेवा, महानिदेशालय की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, डॉ. चंद्र प्रकाश त्रिपाठी को गढ़वाल मंडल, पौड़ी के लिए निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण बनाया गया है।
इसके अलावा डॉ. रमेश चंद्र पंत को प्रभारी निदेशक स्वास्थ्य सेवा, डॉ. प्रीति पंत और वंदना सेमवाल को संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय नियुक्त किया गया है।
अपर व संयुक्त निदेशक स्तर पर भी तबादले
इस प्रशासनिक बदलाव में हाल ही में पदोन्नत 9 अपर निदेशकों को नई तैनाती दी गई है, जबकि 12 संयुक्त निदेशक स्तर के चिकित्सकों को विभिन्न स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है।
रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल को मिला नया अधीक्षक
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज बडोनी के आकस्मिक निधन के बाद, रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल में वरिष्ठतम चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र कुमार द्विवेदी को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
आयुष विभाग में भी तबादले
संयुक्त निदेशक पद पर कार्यरत डॉ. मिथिलेश कुमार को देहरादून का जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी बनाया गया है। इसके अलावा, डॉ. जीपीएस जंगपांगी को संयुक्त निदेशक आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं निदेशालय और डॉ. अतुल सिंह नेगी को हरिद्वार में अपर जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी पद पर नियुक्त किया गया है।
निष्कर्ष
इस बड़े स्तर के फेरबदल से राज्य के स्वास्थ्य प्रशासनिक ढांचे में नई ऊर्जा के साथ जिम्मेदारी का संतुलन सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। सरकार का यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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