देहरादून।
प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने वाली दो प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं के लिए रास्ता अब लगभग साफ होता नजर आ रहा है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने नई दिल्ली में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण सचिव तन्मय कुमार से भेंट कर त्यूणी-प्लासू (72 मेगावाट) और सिरकारी भ्योल रुपासिया बगड़ (120 मेगावाट) परियोजनाओं को शीघ्र वन स्वीकृति देने का आग्रह किया।
मुख्य सचिव ने बताया कि दोनों परियोजनाओं से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही मंत्रालय को सौंपे जा चुके हैं और अब वन स्वीकृति की प्रतीक्षा है। केंद्रीय सचिव ने इस दिशा में सकारात्मक कार्यवाही का संकेत दिया है, जिससे जल्द ही इन परियोजनाओं पर निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना बन गई है। परियोजनाओं के पूर्ण होने पर राज्य को बिजली संकट से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
मनरेगा फंड और ‘हाउस ऑफ हिमालय’ पर भी चर्चा
नई दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्य सचिव ने केंद्रीय ग्रामीण विकास सचिव शैलेश कुमार सिंह से भी मुलाकात की और मनरेगा के तहत 270 करोड़ रुपये की लंबित राशि को जल्द जारी करने का अनुरोध किया।
इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘हाउस ऑफ हिमालय’ को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा, जिससे राज्य के पारंपरिक उत्पादों, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच मिल सके। इस पहल के तहत दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ‘हाउस ऑफ हिमालय’ के आउटलेट खोलने की बात भी रखी गई।
इन बैठकों से यह संकेत मिला है कि राज्य की प्राथमिकताओं को केंद्र सरकार के स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में प्रदेश को विकास की नई रफ्तार मिल सकती है।
यह भी पढें- देहरादून: पति की मृत्यु के बाद बीमा राशि के लिए भटक रही महिला को मिला इंसाफ, जिलाधिकारी ने काटी बैंक की आरसी





