Kainchi Dham Mela 2025: 15 जून को कैंची मंदिर में जुटेगी भारी भीड़, जाम से बचने के लिए तैयार किया गया विशेष योजना। - Doonprimenews
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Kainchi Dham Mela 2025: 15 जून को कैंची मंदिर में जुटेगी भारी भीड़, जाम से बचने के लिए तैयार किया गया विशेष योजना।

On: June 5, 2025 11:21 AM
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उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित प्रसिद्ध कैंची धाम मंदिर में इस वर्ष भी 15 जून को स्थापना दिवस पर विशाल मेला आयोजित किया जाएगा। नीम करोली बाबा के दर्शन के लिए देशभर से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। हर वर्ष की तरह इस बार भी भक्तों की भीड़ तीन-चार दिन पहले से ही उमड़ने लगेगी।

जाम से निपटने के लिए चलेगी शटल सेवा

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों—हल्द्वानी से भीमताल और भवाली—पर भारी भीड़ के चलते जाम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसे देखते हुए प्रशासन ने खास तैयारियां शुरू कर दी हैं। जाम से राहत दिलाने के लिए उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) और केमू की बसों को शटल सेवा के रूप में चलाया जाएगा ताकि निजी वाहनों की संख्या को सीमित किया जा सके।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

बुधवार को आरटीओ प्रवर्तन अधिकारी डॉ. गुरदेव सिंह की अध्यक्षता में रोडवेज, केमू प्रबंधन और टैक्सी यूनियन के साथ बैठक कर ट्रैफिक मैनेजमेंट और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर रणनीति बनाई गई।

हर मुराद पूरी करने वाले बाबा

कहा जाता है कि नीम करोली बाबा अपने भक्तों की हर प्रार्थना सुनते हैं और सच्चे मन से मांगी गई मुराद जरूर पूरी करते हैं। यही वजह है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इस दिन बाबा के दर्शन करने के लिए कैंची धाम पहुंचते हैं। इस दिन मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में एक अलग ही ऊर्जा और आस्था का माहौल देखने को मिलता है।

नीम करोली बाबा: एक दिव्य व्यक्तित्व

नीम करोली बाबा को बीसवीं सदी के महानतम संतों में गिना जाता है। उनका जन्म वर्ष 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था। उनका मूल नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था और वे एक संपन्न ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे।

महज 11 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई थी, लेकिन बचपन से ही वैराग्य की ओर झुकाव होने के कारण उन्होंने जल्द ही गृहस्थ जीवन त्याग कर सन्यास का मार्ग अपनाया। हालांकि बाद में उन्होंने भक्ति और साधना के साथ पारिवारिक जीवन को भी निभाया।

नीम करोली बाबा को कई नामों से जाना जाता है—लक्ष्मण दास, नीम करोली बाबा, तिकोनिया वाले बाबा और तलैय्या बाबा। उन्हें कलियुग में हनुमान जी का अवतार भी माना जाता है। वे बजरंगबली के अनन्य भक्त थे और अपने अलौकिक चमत्कारों तथा आध्यात्मिक ज्ञान के लिए पूरे भारत और विश्व में प्रसिद्ध हैं।

यह भी पढें- उत्तराखंड में हरित क्रांति की ओर कदम, हाइब्रिड व स्वच्छ ईंधन वाहनों को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

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