देहरादून। उत्तराखंड एसटीएफ ने राजधानी के सेलाकुई क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली दवाओं और शराब के फर्जी क्यूआर कोड व रैपर तैयार करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। टीम ने एक मकान पर छापेमारी कर इस रैकेट के मास्टरमाइंड संतोष कुमार को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। वह मूल रूप से बिहार के छपरा जिले का रहने वाला है। मौके से भारी मात्रा में नकली रैपर, क्यूआर कोड और स्टीकर बरामद किए गए हैं।
एसटीएफ को कई दवा कंपनियों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि बाजार में उनके नाम से नकली उत्पाद बेचे जा रहे हैं। इस पर एसटीएफ की टीम ने जांच शुरू की और मुखबिर की सूचना के आधार पर बायांखाला कॉलोनी (राजा रोड के पास) में एक मकान पर दबिश दी गई। यहां से गिरफ्तार आरोपी की पहचान संतोष कुमार, निवासी ग्राम हसुलानी, थाना कोपा, जिला छपरा (बिहार) के रूप में की गई।
छापेमारी में मिली चौंकाने वाली सामग्री
एसटीएफ टीम को मकान से 658 नकली क्यूआर कोड और रैपर दवा कंपनियों के तथा 386 शराब कंपनियों के स्टीकर व क्यूआर कोड बरामद हुए। इनमें से 114 नकली स्टिकर उत्तराखंड ब्रांड की शराब के थे, जिन पर उत्तराखंड शासन का लोगो भी छपा था। इसके अलावा, रॉयल स्टैग ब्रांड की शराब के 272 नकली क्यूआर कोड लेबल भी मौके से जब्त किए गए।
फर्जी रैपर में नामी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल
पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपी कई प्रसिद्ध फार्मा कंपनियों जैसे सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज, ग्लेनमार्क और अल्केम लेबोरेट्रीज आदि के नकली रैपर और क्यूआर कोड तैयार करता था। इन कंपनियों के अधिकारियों ने पहले भी एसटीएफ को इस तरह की धोखाधड़ी की शिकायतें दी थीं।
गिरफ्तारी से हुआ गिरोह का खुलासा, कई नाम आए सामने
पूछताछ में संतोष कुमार ने खुलासा किया कि वह यह पूरा काम अक्षय नामक व्यक्ति के इशारे पर करता था, हालांकि वह अक्षय का असली नाम या ठिकाना नहीं जानता। उसने बताया कि वह देहरादून निवासी विवेकानंद से नकली रैपर डिजाइन करवाता है। साथ ही राजेंद्र चौधरी नामक व्यक्ति के लिए भी शराब के नकली स्टिकर छपवाए गए थे।
पुलिस जुटी गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि आरोपी के खिलाफ थाना सेलाकुई में कॉपीराइट एक्ट समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही पूरे गिरोह को कानून के कटघरे में लाया जाएगा।
निष्कर्ष: इस मामले ने दवा व शराब बाजार में नकली उत्पादों के खतरे को उजागर कर दिया है। एसटीएफ की कार्रवाई से यह साफ है कि राज्य में ऐसे संगठित अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।





